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वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह का निधन


छह बार रहे हिमाचल के मुख्यमंत्री



शिमला, 08 जुलाई (हि.स.)। पिछले सवा दो महीने से शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में भर्ती वयोवृद्ध कांग्रेस नेता और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का गुरुवार तड़के निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। सुबह करीब 3 बजकर 40 मिनट पर उनका निधन हुआ। दूसरी बार कोरोना से जंग जीतने के बाद वीरभद्र सिंह की हालत नाजुक बनी हुई थी और पिछले तीन दिन से वह वेंटिलेटर पर थे।

आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकिसा अधीक्षक डॉक्टर जनक राज ने बताया कि दुखी मन से आम जन को सूचित किया जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अब हमारे बीच नहीं हैं। वीरभद्र सिंह आज सुबह 3:40 बजे लंबी बीमारी के बाद स्वर्गसिधार गये।

वीरभद्र सिंह ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में लम्बे समय तक देश की सेवा की है। वे देश के वरिष्ठ नेताओं में से थे। हिमाचल की राजनीति व विकास में अहम योगदान देने वाले वीरभद्र सिंह के निधन से प्रदेश में शोक में डूब गया है। उनके जाने से कांग्रेस ने बड़ा नेता खो दिया है। पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में अगला विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। वर्तमान में वीरभद्र सिंह अर्की से कांग्रेस के विधायक थे। उनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान से होगी। वीरभद्र सिंह की मृत्यु से उनके चाहनेवालों को गहरा सदमा लगा है। इस राजनेता ने छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री का पद संभाला और प्रदेश के विकास को गति दी। वह एक ऐसे करिश्माई व्यक्तित्व थे जिन्हें दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी दलों के नेताओं ने भरपूर सम्मान दिया।

एक नजर वीरभद्र सिंह के जीवन पर

वीरभद्र सिंह का जन्म 23 जून 1934 को शिमला जिले के सराहन में हुआ। वे हिमाचल के सबसे ज्यादा छह बार सीएम हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल शिमला से ही हुई। बाद में उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से बीए ऑनर्स की पढ़ाई की।

वीरभद्र सिंह ने पहली बार सन 1962 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और संसद पहुंचे। इसके बाद 1967 और 1971 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की। वर्ष 1980 में वीरभद्र सिंह ने फिर चुनावी ताल ठोकी और सांसद चुने गए। उन्हें इस दौरान राज्य मंत्री उद्योग मंत्री का प्रभार मिला था। इसके बाद वीरभद्र सिंह ने प्रदेश राजनीति की ओर रुख किया।

वीरभद्र सिंह 1983 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और 1990 तक मुख्यमंत्री के पद रहे. इसके बाद 1993 और 1998 और 2003 में वह फिर से सीएम की कुर्सी पर काबिज हुए. 2012 में वे छठी बार हिमाचल के सीएम चुन गए। वीरभद्र सिंह केंद्र में दो बार रहे मंत्री रहे। वर्ष 1976 और 1977 के बीच वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में पर्यटन और नागरिक उड्डयन के लिए उपमंत्री का राष्ट्रीय कार्यालय भी संभाला था। वह 1980 से 1983 के बीच उद्योग मंत्री रहे। मई 2009 से जनवरी 2011 तक उन्हें केंद्रीय इस्पात मंत्री का जिम्मा सौंपा गया था। बाद में जून 2012 में उन्हें माइक्रो, स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज जिम्मेदारी सौंपी गई।

प्रदेश की राजनीति में वीरभद्र सिंह ने बड़ा मुकाम हासिल किया है। वीरभद्र सिंह ने वर्ष 1983 में प्रदेश राजनीति में सक्रियता बढ़ाई। सन 1983 में वह जुब्बल कोटखाई सीट से उपचुनाव जीते। इसके बाद सन 1985 के विधानसभा चुनावों में वीरभद्र सिंह ने जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से 1990, 1993, 1998 और 2003 में विधानसभा चुनाव जीते। सन 1998 से लेकर 2003 तक वह नेता विपक्ष भी रहे। वर्ष 2012 में उन्होंने शिमला ग्रामीण और वर्ष 2017 में अर्की विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की।