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तीन दिवसीय ‘जनजातीय नेता सम्मेलन ‘ ‘पूर्वोत्तर की आवाज’ आरंभ


गुवाहाटी, 10 सितम्बर (हि.स.)। गुवाहाटी के सोनापुर के तपेसिया स्थित लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, पूर्वोत्तर स्टेडियम में शुक्रवार को भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की पहल पर ‘जनजातीय नेता सम्मेलन ’ ‘पूर्वोत्तर की आवाज’ का तीन दिवसीय कार्यक्रम आरंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने किया।

इस कार्यक्रम में पूर्वोत्तर के 400 जनजातीय संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र खरादी और अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हर्ष चौहान के साथ ही अन्य प्रमुख व्यक्ति हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम के जरिए पूर्वोत्तर के सभी आदिवासी जनगोष्ठियों की समस्याओं को राष्ट्रीय पटल पर रखने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन आगामी 12 सितम्बर को होगा।

‘जनजातीय नेता सम्मेलन’ का आयोजन भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा संचालित एक उद्यमी आदिवासी धर्म संस्कृति सुरक्षा मंच द्वारा किया गया है। सम्मेलन के संबंध में मंच के अध्यक्ष जलेश्वर ब्रह्म ने बताया कि अंतिम दिन के कार्यक्रम में केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

सम्मेलन के उद्देश्य के बारे में जलेश्वर ब्रह्म ने कहा कि हम सभी अपनी सनातन आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रहरी हैं। हमें सभी समुदायों और उनके अपने संगठनों पर गर्व है। आदिवासी धर्म संस्कृति सुरक्षा मंच समाज में विशेष रूप से विभिन्न समुदायों की जनजातीय मान्यताओं, संस्कृतियों के संरक्षण और विकास के लिए अथक परिश्रम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि जनजातियों में बहुत प्रतिभा है। इनमें काफी संभावनाएं हैं, सफलता की कहानियां भी हैं। इसको एकीकृत समाज के सामने साझा करना, इस आयोजन का उद्देश्य है। इस क्षेत्र में बहुत काम किया जाना है, अभी भी कई चुनौतियां हैं। हम बुराई से लड़ रहे हैं। विभिन्न समस्याओं के समाधान में भी बाधाएं हैं। फिर भी हमें सामूहिक रूप से लक्ष्य को पूरा करना होगा।

जलेश्वर ब्रह्म ने कहा कि आदिवासी धर्म संस्कृति सुरक्षा मंच द्वारा आयोजित अतीत की गतिविधियों जैसे जनजतियों के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर कार्यशालाएं, भूमि अधिकार कार्यशालाएं, पूर्वोत्तर युवा सम्मेलन, पारंपरिक कानून पर कार्यशालाएं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान यात्रा कार्यक्रम, जन युवा नेताओं के सम्मेलन समेत अन्य कई कार्यक्रम हैं। इन सबके माध्यम से हम सभी अपने काम, आंदोलन का विस्तार और समायोजित करने की कोशिश कर रहे हैं। हम निःस्संदेह अब अच्छी स्थिति में हैं। लोग अतीत में गलतियों को समझकर उसके मूल की खोज कर रहे हैं। समाज जाग रहा है। लोग हमसे ज्यादा उम्मीद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस बार पूर्वोत्तर के विभिन्न समुदायों के आदिवासी नेताओं को एक मंच पर लाकर सम्मेलन का आयोजन किया गया है। तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न आदिवासी परंपराओं, सामाजिक, पारंपरिक कानूनों, अनुसूचित जनजातियों की कानूनी स्थिति आदि पर चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन में प्रत्येक आदिवासी जनगोष्ठी से कम से कम पांच प्रमुख प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें प्रत्येक समुदाय की एक महिला और शीर्ष निकाय शामिल हैं।