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शेयर बाजार की तेजी से आर्थिक विशेषज्ञ भी हैरान, अगस्त में सेसेक्स में 4723 अंकों की तेजी


नई दिल्ली, 31 अगस्त (हि.स.)। भारतीय शेयर बाजार ने अपनी शानदार तेजी से बाजार के विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। पिछले 8 महीने के दौरान सेंसेक्स ने 50 हजार अंक के स्तर से बढ़कर 57,600 अंक के स्तर को भी पार कर लिया है। सेंसेक्स की हैरान करने वाली चाल अगस्त में सबसे ज्यादा तेज रही इस महीने के दौरान सेंसेक्स ने 54 हजार से लेकर 57 हजार तक का सफर पूरा करने में 27 कैलेंडर दिन के दौरान सिर्फ 18 कारोबारी दिन का समय लिया।

अगस्त महीने की कारोबारी शुरुआत 2 अगस्त को सोमवार के पहले कारोबारी दिन से हुई थी। 2 अगस्त को सेंसेक्स 52,901.28 अंक के स्तर पर खुला था। इसके दो दिन बाद 4 अगस्त को ही सेंसेक्स छलांग लगाते हुए 54 हजार अंक के दायरे में पहुंच गया। 4 अगस्त को सेंसेक्स 54,071.22 के स्तर पर खुला और 54,369.77 अंक के स्तर पर बंद हुआ।

इसके 9 कैलेंडर दिन के बाद ही 13 अगस्त को सेंसेक्स 55 हजारी बनने में कामयाब रहा। सेंसेक्स की तेज गति आगे भी जारी रही, जिसके कारण अगले 5 कैलेंडर दिनों के दौरान सिर्फ 3 कारोबारी दिन बिताने के बाद ही 18 अगस्त को सेंसेक्स 56 हजार के दायरे को पार कर गया। हालांकि इस स्तर पर स्ट्रॉन्ग रेजिस्टेंस होने की वजह से सेंसेक्स इस ऊंचाई पर टिक नहीं सका। 18 अगस्त के बाद भी सेंसेक्स ने और 5 बार 56 हजार अंक के दायरे को पार किया, लेकिन तीन बार 56 हजार के स्तर पर और दो बार 57 हजार के स्तर पर स्ट्रॉन्ग रेजिस्टेंस होने की वजह से सेंसेक्स की रफ्तार को ब्रेक लगता रहा।

आज सेंसेक्स ने सभी बाधाओं को पार करते हुए ना केवल 57 हजार के दायरे को पार किया, बल्कि आज का कारोबार खत्म होते वक्त भी 662.63 अंक की मजबूती के साथ 57,552.39 अंक के स्तर पर खुद को टिकाए रखने में भी सफल रहा। इन आंकड़ों को देखें तो सेंसेक्स ने अगस्त की शुरुआत 52,901.28 अंक के स्तर से की और अगस्त के अंतिम कारोबारी दिन यानी आज के कारोबार के दौरान दिन के सर्वोच्च स्तर 57,625.26 अंक तक के स्तर को छुआ। इस तरह अगस्त के महीने में ही सेंसेक्स ने 4,723.98 अंक की शानदार मजबूती दर्ज की।

अगर बात साल 2021 की शुरुआत से अभी तक की करें तो सेंसेक्स इस साल 21 जनवरी को 50 हजार के स्तर तक पहुंचा था। इसके 15 कैलेंडर दिनों बाद 5 फरवरी को सेंसेक्स ने 51 हजार का और फिर 15 फरवरी को 52 हजार का स्तर हासिल किया। इसके बाद सेंसेक्स में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहा। अंत में 127 कैलेंडर दिन बीतने के बाद 22 जून को सेंसेक्स 53 हजार अंक के स्तर तक पहुंचा। इसके बाद सेंसेक्स में फिर कुछ समय के लिए ठहराव आ गया। अगले 43 दिन तक कभी 53 हजार तो कभी गिरकर 52 हजार के दायरे में ही ऊपर नीचे होने के बाद आखिर 4 अगस्त को सेंसेक्स में 54 हजार के बैरियर को पार किया। उसके बाद से आज तक की अवधि में शेयर बाजार में सेंसेक्स की जो चाल रही, उसने महीने के आखिरी दिन 57 हजार के स्तर को पार करके नया इतिहास रच डाला।

इसी तरह अगर निफ्टी की चाल को देखा जाए, तो निफ्टी ने 8 महीने के सफर में 3 हजार अंक की मजबूती हासिल की। निफ्टी 31 दिसंबर 2020 को 14 हजार अंक के स्तर पर पहुंचा था। निफ्टी को 14 हजार से लेकर 15 हजार अंक तक पहुंचने में कुल 36 कैलेंडर दिन का समय लगा। 5 फरवरी को निफ्टी पहली बार 15 हजार के दायरे में आया। लेकिन इसके बाद 16 हजार अंक का स्तर छूने में निफ्टी को 179 कैलेंडर दिन लगे। 3 अगस्त को निफ्टी 16 हजारी बनने में कामयाब हुआ। और इसके बाद सिर्फ 28 कैलेंडर दिन में ही निफ्टी कुलांचे भरते हुए 17 हजार अंक के दायरे तक पहुंच गया।

ग्लोबल सिक्योरिटीज के मार्केटिंग हेड विपिन चड्डा का कहना है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान शेयर बाजार बुरी तरह से ध्वस्त हो गया था। क्योंकि इस जानलेवा बीमारी के संक्रमण की वजह से देश में कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गई थीं। लेकिन कोरोना के संक्रमण में कमी आने और वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज होने के बाद आर्थिक गतिविधियां भी पटरी पर लौटने लगी हैं। खासकर विदेशी निवेश में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही जुलाई महीने के आर्थिक नतीजों ने भी कारोबार जगत को उत्साहित किया है। बाजार का उत्साह बढ़ाने में अगस्त के महीने में कैश फ्लो में हुई बढ़ोतरी का भी अहम योगदान रहा है। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती ने भी देश के कारोबारी माहौल को सकारात्मक बना दिया है। इसका प्रत्यक्ष असर शेयर बाजार की तेजी के रूप में भी नजर आ रहा है।

हालांकि शेयर बाजार के जानकार मौजूदा समय को छोटे निवेशकों के लिए काफी जोखिम भरा मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी छोटे निवेशकों को और कम अवधि के लिए निवेश करने वाले लोगों को शेयर बाजार में निवेश करने के जोखिम से बचना चाहिए। ऐसे निवेशकों को बाजार में करेक्शन होने का इंतजार करना चाहिए, ताकि उन्हें अपने निवेश के एवज में नुकसान का सामना न करना पड़े।