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छात्रवृति घोटाला : सीबीआई के निशाने पर तीन निजी शिक्षण संस्थान, खंगाला जा रहा रिकार्ड


शिमला, 14 जुलाई (हि.स.)। बहुचर्चित छात्रवृति घोटाले में तीन निजी शिक्षण संस्थानों के खिलाफ सी.बी.आई. ने शिकंजा कस दिया है। इसी कड़ी में जांच एजेंसी ने संबंधित तीनों संस्थानों और विभिन्न बैंकों से कब्जे में लिए गए रिकार्ड को खंगालने की प्रकिया शुरु कर दी। सूत्रों के अनुसार सी.बी.आई. जल्द ही छानबीन को आगे बढ़ाते हुए संस्थानों के कर्मचारियों व अन्यों को पूछताछ के लिए शिमला तलब कर सकती है।

दरअसल प्रदेश में सामने आए छात्रवृति घोटाले में 22 से अधिक निजी संस्थानों पर करोड़ो रुपए की छात्रवृति राशि हड़पने का आरोप है। सी.बी.आई अब तक 11 के खिलाफ जांच को अमलीजामा पहनाते हुए अदालत में चालान भी पेश कर चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अन्य संस्थानों से जुड़े मामलों में भी जांच पूरी होने पर अलग-अलग चार्जशीट दायर की जाएगी।

छानबीन में यह भी सामने आया है कि करोड़ो रुपए की हड़पी गई छात्रवृति राशि का कुछ हिस्सा बिजनेस में भी इंवेस्टमेंट किया गया। पूरे घोटाले में शिक्षा विभाग के तात्कालीन अधिकारी अरविंद राजटा की भूमिका सबसे अहम बनकर सामने आई है। सिस्टम को भनक तक नहीं लगी विभिन्न निजी संस्थानों ने हजारों छात्रों के नाम पर फर्जी तरीके से करोड़ों रुपए की छात्रवृति हड़प ली जबकि पूरे सिस्टम को कई सालों तक भनक नहीं लगी। जब मामला सामने आया तो पूरा घोटाला 250 करोड़ से अधिक आंका गया। सी.बी.आई. जांच के अंतर्गत सरकारी संस्थानों में अनियमिताओं से जुड़े कोई साक्ष्य नहीं मिले है। अब तक निजी संस्थानों की संलिप्ता पूरे घोटाले में सामने आई है।

उल्लेखनीय है कि यह मामला एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति में 200 करोड़ से अधिक फर्जीवाड़े का है, जो कि साल 2013-14 और 2016-17 के दौरान हुआ था। हिमाचल प्रदेश सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने 7 मई 2019 को मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने जनवरी 2020 में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधीक्षक अरविंद राज्टा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की नवांशहर शाखा का हेड कैशियर और ऊना के केसी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी है। पिछले दिनों सीबीआई ने नाइलेट के नाम पर चल रहे नौ फर्जी शिक्षण संस्थानों के तीन निदेशकों को गिरफ्तार किया है जो अभी पांच दिन के सीबीआई रिमांड पर है। आरोपियों में शिक्षण संस्थानों के निदेशक कृष्ण कुमार, राजदीप सिंह और बबिता राज्टा शामिल हैं।