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गैरजरूरी था नीट में आरक्षण को लेकर मद्रास हाई कोर्ट का फैसला : सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली, 24 सितंबर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति को जरूरी बताने वाले मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट का फैसला गैरजरूरी था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट अवमानना मामले की सुनवाई कर रही है जिसमें नीट के अखिल भारतीय कोटे में अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू करने की मांग की गई है। हाई कोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एएसजी केएम नटराज ने कहा कि हाई कोर्ट को ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी वो भी तब जब वो अवमानना के मामले की सुनवाई कर रही हो।

सुनवाई के दौरान डीएमके की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मामला काफी उलझा हुआ है। केंद्र की याचिका को नीट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अन्य पिछड़ा वर्गों को आरक्षण देने की मांग करनेवाली सभी याचिकाओं के साथ सुना जाना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि 103वें संविधान संशोधन की पांच सदस्यीय संविधान बेंच समीक्षा कर रही है।

दरअसल, 25 अगस्त को हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि 29 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण देने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की टिप्पणी को निरस्त कर दिया।