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सैन्य बलों के सर्वोच्च कमांडर 06 सितम्बर को नौसेना उड्डयन को देंगे ‘राष्ट्रपति कलर’


डाक विभाग एक विशेष दिवस कवर जारी करेगा, रक्षा मंत्री और नौसेना प्रमुख भी शामिल होंगे

 सशस्त्र बलों को ‘राष्ट्रपति कलर’ से सम्मानित करने की शुरुआत भारतीय नौसेना से ही हुई थी



नई दिल्ली, 01 सितम्बर (हि.स.)। भारतीय सैन्य बलों के सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 06 सितम्बर को आईएनएस हंसा, गोवा में आयोजित होने वाली औपचारिक परेड में भारतीय नौसेना उड्डयन को ‘राष्ट्रपति कलर’ से सम्मानित करेंगे। इस अवसर पर डाक विभाग एक विशेष दिवस कवर जारी करेगा। इस समारोह में गोवा के राज्यपाल, रक्षा मंत्री, गोवा के मुख्यमंत्री, नौसेना प्रमुख एवं कई अन्य नागरिक और सैन्य गणमान्य व्यक्तियों के शामिल होने की उम्मीद है।

‘राष्ट्रपति कलर’ राष्ट्र के लिए असाधारण सेवा के सम्मान में एक सैन्य इकाई को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। 27 मई 1951 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारतीय सशस्त्र बलों को ‘राष्ट्रपति कलर’ से सम्मानित करने की शुरुआत भारतीय नौसेना से की थी। इससे पहले दक्षिणी नौसेना कमान, पूर्वी नौसेना कमान, पश्चिमी नौसेना कमान, पूर्वी बेड़े, पश्चिमी बेड़े, पनडुब्बी शाखा, आईएनएस शिवाजी और भारतीय नौसेना अकादमी को ‘राष्ट्रपति कलर’ से सम्मानित किया जा चुका है। नेवल एविएशन ने ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन जुपिटर, ऑपरेशन शील्ड, ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन पराक्रम में शामिल होकर खुद को प्रतिष्ठित किया है। इसी साल में मई में आये चक्रवात ‘ताउते’ के दौरान इस नेवल एविएशन के मुंबई में किए गए बचाव अभियान ताजा उदाहरण हैं।

आईएनएस हंसा पर गोवा में भारतीय नौसेना उड्डयन 13 जनवरी 1951 को पहले सीलैंड विमान का अधिग्रहण करने के बाद अस्तित्व में आया। इसी तरह 11 मई 1953 को आईएनएस गरुड़ पर पहला नौसेना वायु स्टेशन का कमीशन किया गया था। 1958 में सशस्त्र जुगनू विमान के आने के बाद नौसेना के उड्डयन को और मजबूती मिली और इसके बाद दुर्जेय नौसेना ने लगातार विस्तार किया। इसके बाद 1959 में 10 सीलैंड, 10 जुगनू और तीन एचटी-2 विमानों के साथ भारतीय नौसेना वायु स्क्वाड्रन (आईएनएएस) 550 की कमीशनिंग हुई। इसके बाद नौसेना उड्डयन में अलौएट से लेकर विभिन्न प्रकार के रोटरी विंग प्लेटफॉर्म भी जोड़े गए हैं जिसमें एस-55, सीकिंग 42ए और 42बी, कामोव 25, 28 और 31, यूएच3एच, उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर (एएलएच) और नवीनतम एमएच-60आर हेलिकॉप्टर हैं।

प्रवक्ता के अनुसार एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत को 1957 में भारतीय नौसेना उड्डयन में शामिल किया गया जिसने 1961 में गोवा मुक्ति आन्दोलन और फिर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1976 में भारतीय वायु सेना से सुपर-नक्षत्र, 1977 में आईएल-38 और 1989 में टीयू 142 एम को शामिल करने के साथ समुद्री टोही में भी लगातार वृद्धि हुई है। 1991 में डोर्नियर-228 और 2013 में अत्याधुनिक बोइंग पी-8आई विमान को शामिल किया गया। 1980 के दशक के मध्य में पौराणिक सी हैरियर के साथ आईएनएस विराट को शामिल करने से नौसेना के कैरियर संचालन को मजबूती मिली। पिछले दशक में शक्तिशाली आईएनएस विक्रमादित्य पर मिग 29के को तैनात किया गया। नए अवतार में स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के इसी माह शुरू हुए समुद्री परीक्षणों से भारतीय नौसेना की कैरियर क्षमता को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला है।

भारतीय नौसेना उड्डयन नौ हवाई स्टेशनों और भारतीय समुद्र तट के साथ और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में तीन नौसैनिक हवाई परिक्षेत्रों का दावा करता है। पिछले सात दशकों में, यह 250 से अधिक विमानों के साथ एक आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और अत्यधिक शक्तिशाली बल में परिवर्तित हो गया है, जिसमें कैरियर-जनित लड़ाकू विमान, समुद्री टोही विमान, हेलीकॉप्टर और दूर से चलने वाले विमान शामिल हैं। नौसेना की लड़ाकू शाखा में महिलाओं को शामिल करने और उन्हें अपने पुरुष समकक्षों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने में नेवल एविएशन सबसे आगे रहा है। नौसेना एविएटर्स को पिछले कुछ वर्षों में एक महावीर चक्र, छह वीर चक्र, एक कीर्ति चक्र, सात शौर्य चक्र, एक युद्धसेवा पदक और बड़ी संख्या में नौ सेना पदक (वीरता) से अलंकृत किया गया है। ‘राष्ट्रपति कलर’ का पुरस्कार नौसेना उड्डयन के उच्च पेशेवर मानकों और तारकीय संचालन प्रदर्शन का प्रमाण है, जिसने राष्ट्र की सेवा में खुद को प्रतिष्ठित किया है।