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भारतीय सेना अब कार्गो ड्रोन से ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को पहुंचाएगी सामान


भारतीय कंपनी को 48 हेक्साकॉप्टर ड्रोन खरीदने का ऑर्डर दिया गया

 प्रशिक्षण के लिए मिले ड्रोन से लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रायल शुरू

 एक एमआर-20 ड्रोन 20 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम होगा



नई दिल्ली, 12 सितम्बर (हि.स.)। भारतीय सेना अब पूर्वी लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को कार्गो ड्रोन से भोजन, आवश्यक सामान, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, गोला-बारूद और हथियार पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सेना ने एक भारतीय कंपनी को 48 हेक्साकॉप्टर ड्रोन खरीदने का ऑर्डर दिया है। यह एमआर-20 ड्रोन 20 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम होगा। कंपनी ने इस साल के अंत तक आपूर्ति करने से पहले ही भारतीय सेना को प्रशिक्षण और तैयारी के लिए कुछ ड्रोन सौंप दिए हैं जिनका इस्तेमाल लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शुरू कर दिया गया है।

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ चीनी सेना के साथ गतिरोध बढ़ने के बाद भारतीय सेना भी बड़े पैमाने पर सक्रिय है। भारतीय सेना उच्च ऊंचाई पर तैनात सेना की इकाइयों से जुड़े कार्यों में काम ड्रोन का इस्तेमाल करना चाह रही है। ऊंचाई पर तैनात सैनिकों तक खाने-पीने का सामान और आपातकालीन चिकित्सा सहायता पहुंचाने में ड्रोन का इस्तेमाल करने के लिए सेना ने प्रोटोकॉल तैयार करना शुरू कर दिया है। भारत ने पहले ही टारगेट पर सीधे चोट करने वाले 100 स्काई स्ट्राइकर का ऑर्डर दिया है जो अगले साल तक सेना को मिल जाएंगे। अब लद्दाख जैसे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में रसद और हथियार पहुंचाने वाले कार्गो ड्रोन का भी ट्रायल शुरू हो गया है।

सेना ने 48 कार्गो ड्रोन खरीदने का ऑर्डर आपातकालीन अनुबंध के तहत भारतीय कंपनी रैफे एमफिब्र को दिया है। कंपनी का कहना है कि यह ड्रोन सियाचिन के उच्च ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में काम कर सकते हैं और पनडुब्बियों से भी लॉन्च किए जा सकते हैं। यह लड़ाकू पेलोड गिरा सकते हैं, कम तीव्रता वाले संघर्षों को प्रभावित कर सकते हैं, 100 किलो स्टोर उठा सकते हैं और हथेली से भी लॉन्च किए जा सकते हैं। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग संचालित विशेषताएं शामिल हैं। ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन, रिमोट वीडियो टर्मिनल और अल्ट्रा लॉन्ग रेंज कम्युनिकेशन इक्विपमेंट से युक्त ग्राउंड सपोर्ट सेटअप से रियल टाइम मॉनिटरिंग और मिशन प्लानिंग को संभव बनाया गया है।

कंपनी ने एक बयान में कहा है कि रैफे की टीम ने अपने यूएवी प्लेटफॉर्म को सपोर्ट करने के लिए 169 से अधिक पेटेंट योग्य तकनीकों का विकास किया है। रैपे में विकसित नोवेल कार्बन फाइबर कम्पोजिट सामग्री हल्के वजन, मजबूत और बेहतर थर्मल और इलेक्ट्रिकल गुण हैं। कुशल और विश्वसनीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ एयरफ्रेम, उच्च घनत्व वाले इलेक्ट्रॉनिक्स के जैव-प्रेरित डिजाइन रैफे के यूएवी प्लेटफार्मों को उनकी सर्वश्रेष्ठ-इन-क्लास दक्षता, मजबूती और पेलोड ले जाने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसमें लक्ष्य का पता लगाने और ट्रैकिंग की क्षमता भारतीय सुरक्षा बलों के लिए यूएवी प्लेटफार्मों के दायरे को व्यापक बनाते हैं, इसलिए ये ड्रोन सेना के लिए बहुत ही मददगार साबित होंगे।

दुनिया के तमाम ताकतवर देशों ने ड्रोन की अहमियत को तेजी से समझा है क्योंकि मिलिट्री ऑपरेशन में ड्रोन बेहद मददगार साबित होने वाला है और कार्गो ड्रोन एमआर-20 तो वाकई किसी वरदान से कम नहीं हैं। चीन के साथ सैन्य गतिरोध बढ़ने पर भारतीय सेना ने अपने स्विच टैक्टिकल सर्विलांस ड्रोन के लिए मुंबई की कंपनी आइडियाफोर्ज को 130 करोड़ रुपये का ठेका दिया। आईडियाफोर्ज रक्षा और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ यूएवी बनाती है। इसी कंपनी के उत्पाद नेत्रा का भारतीय सशस्त्र बल बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं।