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भारत में सैन्य प्रशिक्षण ले रहे 140 अफगानी कैडेट्स ने पश्चिमी देशों से शरण मांगी


कैडेट्स को अफगानिस्तान लौटने पर करना पड़ सकता है तालिबानी नजरबंदी का सामना

 भारत में सैन्य प्रशिक्षण ले रहे 140 अफगान कैडेट्स की ई-वीजा अवधि छह महीने बढ़ाई गई



नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)। भारत में सैन्य प्रशिक्षण लेने के दौरान ही अफगानिस्तान में तालिबानी राज आने से 140 अफगानी कैडेट्स ने अपने मुल्क वापस न जा पाने की स्थिति में कनाडा, इंग्लैंड, जर्मनी सहित पश्चिमी देशों से शरण मांगी है।

मौजूदा प्रशिक्षण सत्र दिसम्बर में पूरा होने के बाद भारत में प्रशिक्षण ले रहे अफगानी कैडेट्स अपने देश लौटकर अफगानिस्तान नेशनल आर्मी (एएनए) का हिस्सा बनते लेकिन अब बदले हालात में इनके लिए अफगानिस्तान लौटने का विकल्प नहीं है। इसीलिए भारत ने अब इन्हें नागरिक-पेशेवर पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देने का फैसला किया है ताकि उन्हें किसी भी देश से शरणार्थी वीजा हासिल करने में आसानी हो सके।

भारत अपने तीन प्रमुख संस्थानों में मित्र देशों के कैडेट्स को सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम चलाता है, जिसके तहत विदेशी प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण की पूरी लागत भारत खुद वहन करता है। इस कार्यक्रम के तहत अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, भूटान, म्यांमार और अन्य देशों के कैडेट्स को भारत में प्रशिक्षण दिया जाता है। देहरादून के भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में भारतीय सेना के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा खड़कवासला, पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। इसमें देहरादून के आईएमए में 80 और बाकी 60 कैडेट्स एनडीए और ओटीए (चेन्नई) में प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं।

भारत के स्वतंत्रता दिवस पर (15 अगस्त) अफगानिस्तान नेशनल आर्मी (एएनए) ने तालिबान के सामने आत्मसमर्पण किया तो उस दिन आईएमए के अफगानी कैडेट्स को उत्तराखंड के जंगलों में प्रशिक्षण दिया जा रहा था। अफगानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण होते ही सुरक्षा के लिहाज से अफगानिस्तान के 80 फॉरेन जेंटलमैन कैडेट्स (एफजीसी) को किसी अज्ञात स्थान पर कड़ी निगरानी में भेज दिया गया। अकादमी में अपने प्रशिक्षण का आखिरी और तीसरा कार्यकाल पूरा कर रहे इन भावी सैन्य अधिकारियों का भाग्य अधर में है। उनमें से अधिकांश के लिए अब अफगानिस्तान लौटना कोई विकल्प नहीं है। इसीलिए भारत ने अब इन्हें नागरिक-पेशेवर पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देने का फैसला किया है ताकि उन्हें किसी भी मित्र देश के लिए शरणार्थी-वीजा हासिल करने में आसानी हो सके।

भारत में प्रशिक्षण ले रहे 140 अफगान कैडेट्स ने कनाडा, इंग्लैंड जर्मनी सहित पश्चिमी देशों में शरणार्थी वीजा के लिए आवेदन किया है। इनमें कुछ अफगान कैडेट्स भारत में ही रहना चाहते हैं, जिसके लिए वे संबंधित एजेंसियों के संपर्क में हैं। हालांकि तालिबान ने सभी सरकारी अधिकारियों का अपराध माफ करते हुए काम पर लौटने के लिए कहा है लेकिन इन कैडेट्स को अपने देश लौटने पर तालिबानी नजरबंदी का सामना करना पड़ सकता है। यहां सैन्य प्रशिक्षण ले रहे कैडेट्स का फैसला भारत सरकार के हाथ में है। वैसे भारत की तीन सैन्य अकादमियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 140 अफगान कैडेट्स की ई-वीजा की अवधि छह महीने के लिए बढ़ा दी गई है। इस दौरान यह अफगान सैन्य प्रशिक्षु अपने बारे में फैसला कर सकते हैं।