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गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव में होगी हिन्द महासागर क्षेत्र में उभरती समुद्री चुनौतियों पर चर्चा


नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में तीन दिवसीय कॉन्क्लेव 07 नवंबर से शुरू होगी

 बहुराष्ट्रीय कार्यक्रम में 12 देशों के नौसेना प्रमुख या उनके प्रतिनिधि शामिल होंगे



नई दिल्ली, 05 नवंबर (हि.स.)। समुद्री सुरक्षा और उभरते गैर-पारंपरिक खतरों पर चर्चा करने के लिए तीन दिवसीय गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (जीएमसी) 07 नवम्बर से नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में शुरू होगा। इस बहुराष्ट्रीय कार्यक्रम में 12 देशों के नौसेना प्रमुख या उनके प्रतिनिधि शामिल होंगे। समुद्री क्षेत्र में रोजमर्रा की शांति को ध्यान में रखते हुए इस कॉन्क्लेव का एजेंडा तैयार किया गया है। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले नौसेना प्रमुख, समुद्री एजेंसियों के प्रमुख हिन्द महासागर क्षेत्र में उभरती और भविष्य की समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के महत्व पर ध्यान देंगे।

गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (जीएमसी) भारतीय नौसेना की आउटरीच पहल है जो समुद्री सुरक्षा के मद्देनजर चर्चा करने के लिए बहुराष्ट्रीय मंच है। यह कॉन्क्लेव का तीसरा संस्करण है जो 07 से शुरू होकर 09 नवंबर तक नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में चलेगा। कॉन्क्लेव में इस साल मई में होने वाली गोवा समुद्री संगोष्ठी-21 के कार्य स्तर पर भी विचार-विमर्श किया जाना है। जीएमसी के इस वर्ष के संस्करण का विषय ‘समुद्री सुरक्षा और उभरते गैर-पारंपरिक खतरे: आईओआर में नौसेनाओं की सक्रिय भूमिका’ रखा गया है। चर्चा का यह मुद्दा समुद्री क्षेत्र में ‘रोजमर्रा की शांति जीतने’ की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

कॉन्क्लेव में भारतीय नौसेना के अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह के अलावा बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड के नौसेना प्रमुख या उनके प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। भारतीय रक्षा सचिव और विदेश सचिव जीएमसी-21 के कॉन्क्लेव में मुख्य भाषण देंगे। कॉन्क्लेव में हिन्द महासागर क्षेत्र (आईओआर) के 21वीं सदी के रणनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर क्षेत्रीय हितधारकों को एक साथ लाने और समकालीन समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जाना है।

नौसेना प्रवक्ता विवेक मधवाल के अनुसार कॉन्क्लेव के तीन सत्रों में कई वक्ता और विशेषज्ञ आईओआर में उभरते गैर-पारंपरिक खतरों का मुकाबला करने के लिए सामूहिक रूप से समुद्री दक्षताओं का लाभ उठाने, समुद्री कानून प्रवर्तन के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और बाहर के क्षेत्रों में उभरते गैर पारंपरिक खतरों को कम करने के लिए जरूरतों पर अपनी राय रखेंगे। कॉन्क्लेव में शामिल होने वाले देशों के बीच हाइड्रोग्राफी और समुद्री सूचना साझा करने के बारे में भी व्यापक विचार-विमर्श होगा। कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले नौसेना प्रमुख, समुद्री एजेंसियों के प्रमुख हिन्द महासागर क्षेत्र में उभरती और भविष्य की समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के महत्व पर ध्यान देंगे।

प्रवक्ता के अनुसार कॉन्क्लेव के एक हिस्से के रूप में आगंतुकों के लिए ‘मेक इन इंडिया प्रदर्शनी’ रखी गई है जिसमें भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग, गोवा के मारमुगाओ पोर्ट ट्रस्ट पर पनडुब्बियों के लिए डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल (डीएसआरवी) की क्षमताओं को देखने का भी मौका मिलेगा। कॉन्क्लेव के तीसरे संस्करण के बाद गोवा समुद्री संगोष्ठी-21 के जरिये भी हिन्द महासागर क्षेत्र में सुरक्षित समुद्र और निरंतर शांति सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा जाएगा।