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चीन को अब जमीन, हवा और पानी तीनों तरफ से घेरने की तैयारी


सुखोई और राफेल की जोड़ी लद्दाख से लेकर उत्तर-पूर्व तक कहर बरपाने में सक्षम

 नौसेना के दो युद्धपोतों में ब्रह्मोस और बराक मिसाइलें तैनात किये जाने की तैयारी

 सेना ने ब्रह्मोस, निर्भय और आकाश मिसाइलों को लद्दाख के पास किया है तैनात



नई दिल्ली, 29 जुलाई (हि.स.)। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन के बाद पश्चिम बंगाल के हाशिमारा वायुसेना स्टेशन पर राफेल फाइटर जेट की तैनाती करने के बाद अब भारत ने चीन को जमीन से लेकर हवा और पानी तक घेरने की तैयारी कर ली है। लद्दाख से लेकर उत्तर-पूर्व तक भारतीय सीमा पर लगातार चुनौती मिलने के बाद अब भारतीय वायुसेना पूरे उत्तर-पूर्व में चीन की हर नापाक हरकत पर नजर रख सकेगी। चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना ने लंबी दूरी की निर्भय और आकाश मिसाइलों को भी लद्दाख के पास तैनात कर रखा है। इसके अलावा नौसेना के नए एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विक्रांत और मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस विशाखापट्टनम में ब्रह्मोस और बराक मिसाइलें तैनात किये जाने की तैयारी है।

अब पहले बात करते हैं वायुसेना की क्योंकि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में पिछले साल 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद से सुखोई-30एमकेआई फाइटर जेट्स में भी ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं। अब इसके बाद ब्रह्मोस मिसाइलों को मिकोयान मिग-29के, हल्के लड़ाकू विमान तेजस और राफेल में भी अगले साल तक तैनात करने की योजना है। पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर पहले से ही सुखोई की स्क्वाड्रन है और अब यहीं पर राफेल की दूसरी स्क्वाड्रन ऑपरेशनल होने के बाद सुखोई और राफेल की जोड़ी जरूरत पड़ने पर लद्दाख से लेकर उत्तर-पूर्व तक कहर बरपा सकती है। राफेल पहले से ही हवा से हवा में मार करने वाली मीटियोर और हवा से जमीन में मार करने वाली स्कैल्प मिसाइल से लैस है। अब आसमान से जमीन पर वार करने वाली फ्रांस की हैमर मिसाइल लगाकर राफेल को और खतरनाक बनाये जाने की तैयारी है।

राफेल की हाशिमारा स्क्वाड्रन मुख्य रूप से चीन स्थित पूर्वी सीमा की देखभाल के लिए जिम्मेदार होगी। सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर स्थित यह स्क्वाड्रन चुंबी वैली से नजदीक है जो सिक्किम, भूटान और चीन का ट्राई-जंक्शन है। यानी यहां से भारतीय वायुसेना पूरे उत्तर-पूर्व में चीन की हर नापाक हरकत पर नजर रख सकेगी। इसके अलावा असम के तेजपुर और छाबुआ में भी फाइटर जेट सुखोई-30एमकेआई तैनात हैं। राफेल की अंबाला स्क्वाड्रन लद्दाख में चीन के साथ उत्तरी सीमा और पाकिस्तान के साथ अन्य क्षेत्रों की देखभाल करेगी। यानी अब राफेल के डर से चीन और पाकिस्तान की सीमा पर दुश्मन किसी भी तरह की हिमाकत करने की जल्दी हिम्मत नहीं करेगा। राफेल ओमनी रोल लड़ाकू विमान है, इसलिए यह पहाड़ों पर कम जगह में उतर सकता है। इसे समुद्र में चलते हुए युद्धपोत पर भी उतार सकते हैं। राफेल चारों तरफ निगरानी रखने में सक्षम राफेल का निशाना बिलकुल सटीक होता है।

भारतीय नौसेना के राजपूत क्लास विध्वंसक आईएनएस रणवीर और आईएनएस रणविजय में, तलवार क्लास की फ्रिगेट आईएनएस तेग, आईएनएस तरकश, आईएनएस त्रिकंड, शिवालिक क्लास फ्रिगेट, कोलकाता क्लास विध्वंसक के आईएनएस चेन्नई में पहले से ही ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं। ब्रह्मोस को पनडुब्बी से इसलिए लॉन्च नहीं किया जा सकता क्योंकि इसका व्यास 0.6 मीटर है। इसलिए अब डीआरडीओ ने अगली पीढ़ी की पनडुब्बी क्रूज मिसाइल (नेक्स्ट जनरेशन सबमरीन लॉन्चेड क्रूज मिसाइल-एनजीएसएलसीएम) लॉन्च कर दी है। भारतीय नौसेना का मौजूदा पनडुब्बी बेड़ा टॉरपीडो ट्यूब के जरिए मिसाइलों को लॉन्च कर सकता था लेकिन अब नई पीढ़ी की क्रूज मिसाइल मिलने के बाद भारत की समुद्र में मारक क्षमता बढ़ जाएगी।इसके अलावा विशाखापट्टनम क्लास के विध्वंसक और नीलगिरी क्लास फ्रिगेट में भी ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात करने की तैयारी है।

भारतीय सेना के पास दुनिया की सबसे घातक मानी जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल की तीन रेजीमेंट्स हैं, जिनमें से एक रेजिमेंट कारगिल में है। यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कम ऊंचाई पर तेजी से उड़कर दुश्मन के राडार तक को धोखा देने में सक्षम है। हवा में ही मार्ग बदलने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल चलते-फिरते टारगेट को भी ध्वस्त कर सकती है। यह किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा दे सकती है, इसलिए इसे मार गिराना लगभग अंसभव है। यह भारत की इकलौती ऐसी मिसाइल है जिसे हवा, पानी, जमीन कहीं से भी दुश्मन पर दागा जा सकता है। रैमजेट तकनीक से बनी ब्रह्मोस मिसाइल उड़ते समय हवा को खींचकर अपनी गति और ऊर्जा बढ़ा लेती है। यह मिसाइल 1200 यूनिट की ऊर्जा पैदा करती है, जिससे किसी भी बड़े से बड़े लक्ष्य को धूल चटाया जा सकता है। इसके अलावा चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना ने लंबी दूरी की निर्भय और आकाश मिसाइलों को भी लद्दाख के पास तैनात कर रखा है।