Wed. Sep 22nd, 2021

भारत ने सैन्य प्रशिक्षण ले रहे अफगानी कैडेट्स के प्रति दिखाई दरियादिली


अब अफगान कैडेट्स को मिलेगा नागरिक-पेशेवर पाठ्यक्रम का प्रमाण पत्र

 भारत में अफगानिस्तान के लगभग 130 कैडेट्स ले रहे हैं सैन्य प्रशिक्षण

 परिजनों से जुड़े रहने के लिए अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग वाले फोन दिए गए



नई दिल्ली, 03 सितम्बर (हि.स.)। अफगानिस्तान में अचानक तालिबानी राज आने के बाद भारत में सैन्य प्रशिक्षण ले रहे लगभग 130 अफगानिस्तान के कैडेटों और अधिकारियों की वतन वापसी खतरे में है। मौजूदा प्रशिक्षण सत्र दिसम्बर में पूरा होने के बाद यह अफगानी कैडेट्स अपने मुल्क लौटकर अफगानिस्तान नेशनल आर्मी (एएनए) का हिस्सा बनते लेकिन अब बदले हालातों में इनके लिए अफगानिस्तान लौटना कोई विकल्प नहीं है। इसलिए भारत ने अब इन्हें नागरिक-पेशेवर पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देने का फैसला किया है ताकि उन्हें किसी भी मित्र देश के लिए शरणार्थी वीजा हासिल करने में आसानी हो सके।

भारत में देहरादून के भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में भारतीय सेना के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। खड़कवासला, पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) भी प्रतिष्ठित संस्थान है जिसकी सैन्य शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक उत्कृष्टता की पहचान है। इसके अलावा चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) भारतीय सेना का एक प्रशिक्षण संस्थान है जो शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षित करता है। इन तीनों प्रशिक्षण संस्थानों में इस समय लगभग 130 अफगानी कैडेट्स को सैन्य प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें देहरादून के आईएमए में 80 और बाकी कैडेट्स एनडीए और ओटीए (चेन्नई) में प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं। भारत की आजादी के दिन जब 15 अगस्त को अफगानिस्तान नेशनल आर्मी (एएनए) ने तालिबान के सामने आत्मसमर्पण किया तो उस दिन आईएमए के अफगानी कैडेट्स को उत्तराखंड के जंगलों में प्रशिक्षण दिया जा रहा था।

अफगानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण होते ही अकादमी में रेड अलर्ट जारी करके विदेशी कैडेट्स को उनके प्रशिक्षण से वापस बुला लिया गया। इसके बाद सुरक्षा के लिहाज से अफगानिस्तान के फॉरेन जेंटलमैन कैडेट्स (एफजीसी) को किसी अज्ञात स्थान पर कड़ी निगरानी में भेज दिया गया। यहां प्रशिक्षण ले रहे 80 अफगानी कैडेट्स को ‘कड़ी निगरानी’ में रखा गया है। अकादमी में अपने प्रशिक्षण का आखिरी और तीसरा कार्यकाल पूरा कर रहे इन भावी सैन्य अधिकारियों का भाग्य अधर में लटक गया है। उनमें से अधिकांश के लिए अब अफगानिस्तान लौटना कोई विकल्प नहीं है। इन्हें हर संभव सहायता देने के लिए अकादमी ने अपने प्रोटोकॉल को भी बदल दिया है। प्रोटोकाल के अनुसार प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को फोन नहीं दिए जाते हैं लेकिन इस संकट के बाद से अफगान कैडेट्स को अपने परिजनों से जुड़े रहने के लिए अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग सुविधा के साथ फोन दिए गए हैं।

मौजूदा प्रशिक्षण सत्र दिसम्बर में पूरा होने के बाद यह अफगानी कैडेट्स अफगानिस्तान नेशनल आर्मी (एएनए) का हिस्सा बनते लेकिन एएनए के सरेंडर करने और उनके देश पर तालिबान का कब्जा होने से अब उन्हें अनिश्चित भविष्य का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि भारत सरकार ने अब तक तालिबान को मान्यता नहीं दी है, लेकिन इन कैडेट्स को अपने देश लौटने पर तालिबानी नजरबंदी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भारत ने अब इन्हें नागरिक-पेशेवर पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देने का फैसला किया है ताकि उन्हें किसी भी मित्र देश के लिए शरणार्थी-वीजा हासिल करने में आसानी हो सके। भारतीय विदेश मंत्रालय मित्र देशों के लिए भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम चलाता है जिसके तहत विदेशी प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण की पूरी लागत भारत खुद वहन करता है। इस कार्यक्रम के तहत अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, भूटान, म्यांमार और अन्य देशों के कैडेट्स को आईएमए देहरादून में प्रशिक्षण दिया जाता है।