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बकरीद पर कोरोना प्रतिबंधों में छूट देने पर केरल सरकार को सुप्रीम फटकार


नई दिल्ली, 20 जुलाई (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद पर कोरोना प्रतिबंधों में छूट देने पर केरल सरकार को फटकार लगाई है। जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने केरल सरकार से कहा कि वे लोगों के जीने के अधिकार का ख्याल करें। कोर्ट ने यूपी में कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने का आदेश दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस मामले को संज्ञान में लाने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि अगर आप पहले कोर्ट में आए होते तो हमने किया होता।

कोर्ट ने कहा कि यह अफसोस की बात है कि केरल सरकार व्यापारियों के आगे झुक गई और लॉकडाउन में ढील दी गई। ढील उन इलाकों में भी दी गई जहां संक्रमण का दर 15 फीसदी स ऊपर है। ये काफी दुखद बात है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी किस्म का दबाव चाहे धार्मिक हो या दूसरी, इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है। लोगों के मौलिक अधिकार सबसे ज्यादा जरूरी हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी स्थिति में कोई अनहोनी होती है तो कोई भी व्यक्ति कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने कहा कि केरल में दस फीसदी से अधिक पॉजिटिविटी रेट के साथ इस तरह का जवाब दिया जा रहा है। यह भी कह रहे हैं कि व्यापारियों ने कह दिया था कि वह हर हाल में दुकान खोलेंगे। यानी दबाव था। ऐसे तो फिर आप शासन चलाने योग्य ही नहीं हैं। तब केरल सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि 15 जून से ही दफ्तर और दुकानें खुलने लगी थीं। यह कोई आज नहीं हो रहा है। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत परिस्थिति का आकलन कर धीरे-धीरे छूट बढ़ाई जा रही है। तब विकास सिंह ने कहा कि वो कोर्ट को भ्रमित कर रहे हैं। तब केरल सरकार ने कहा कि आज छूट का तीसरा दिन है। तब विकास सिंह ने कहा कि कोर्ट अगर आज कोई आदेश देती है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। कोरोना के केस बढ़ सकते हैं।

केरल सरकार ने हलफनामा दायर कर अपना बचाव किया था। केरल सरकार ने जवाब दाखिल कर कहा कि लॉकडाउन हमेशा के लिए नहीं चल सकता। मंदी से परेशान व्यापारियों को राहत देने के लिए त्योहार पर दुकान खोलने की इजाजत दी गई है।

19 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका पीकेडी नांबियार ने दायर की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील विकास सिंह ने कहा था कि केरल में कोरोना के सबसे ज्यादा केस आ रहे हैं। पॉजिटिविटी रेट दस फीसदी है। यूपी में मात्र 0.04 फीसदी है। जब उप्र में कांवड़ यात्रा की इजाजत नहीं दी जा सकती है तो केरल में बकरीद के लिए लॉकडाउन में छूट कैसे दी जा सकती है।

याचिका में कहा गया था कि मेडिकल इमरजेंसी के समय केरल सरकार लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही है। ये याचिका सुप्रीम कोर्ट की ओर से उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा पर स्वत: संज्ञान मामले में हस्तक्षेप याचिका के रूप में दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि केरल सरकार ने 18 जुलाई से 20 जुलाई तक बकरीद त्योहार के लिए कोरोना प्रतिबंधों में ढील दी है। ये फैसला स्वास्थ्य विभाग की सलाह के बिना जारी किया गया। केरल के मुख्यमंत्री ने केरल व्यापारी व्यवसायी ई-कोपाना समिति की सलाह पर ये फैसला किया है।