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झंझारपुर के एडीजे के साथ पुलिस द्वारा की गई मारपीट पर हाईकोर्ट गंभीर ,डीजीपी को किया तलब


पटना, 19 नवंबर (हि.स.)। मधुबनी (झंझारपुर ) के एडीजे अविनाश कुमार -1 सह जिला विधि सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष के चैम्बर में पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी और मारपीट की हुई घटना पर हाईकोर्ट ने देर शाम गुरुवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा यह घटना प्रथम दृष्टया न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालती है। हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार के डीजीपी को 29 नवंबर को कोर्ट में हाज़िर होने का आदेश दिया ह।

मुख्य न्यायाधीश को झंझारपुर के एडीजे अविनाश कुमार -1 और उनके कर्मचारी के साथ पुलिस कर्मियों द्वारा कोर्ट के चैम्बर में किये गए मारपीट के घटना की जानकारी मधुबनी के प्रभारी जिला जज के द्वारा जैसे ही मिली उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे शॉकिंग करार दिया तथा तुरंत स्पेशल बैंच का गठन न्यायाधीश राजन गुप्ता की अध्यक्षता में कर डाला।

हाईकोर्ट ने मधुबनी के जिला जज के रिपोर्ट को रिट याचिका में तब्दील कराते हुए राज्य के मुख्य सचिव , डीजीपी , राज्य के गृह (प्रधान ) सचिव सहित मधुबनी के एसपी को उत्तरवादी बनाने का निर्देश देते हुए तुरंत इस मामले की सुनवाई शुरू करवा दी।

शाम सात बजे इस याचिका पर न्यायमूर्ति राजन गुप्ता एवम न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव , डीजीपी और गृह विभाग के प्रधान सचिव को एक सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि जवाब के साथ साथ पूरे घटना की जांच रिपोर्ट को भी एक सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में प्रस्तुत किया जाय। साथ ही मामले की गम्भीरता को देखते हुए प्रदेश के डीजीपी को 29 नवंबर को कोर्ट में हाजिर रहने का भी आदेश दिया। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर खतरा बताया । हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटना से ऐसा प्रतीत होता है कि अब राज्य में कोई भी सुरक्षित नहीं है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषी को बख्शा नही जाएगा। सुनवाई के समय एडीजी मुख्यालय कोर्ट में उपस्थित थे।इस मामले की अगली सुनवाई 29 नवंबर को फिर होगी ।