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12 नवंबर इतिहास के पन्नों में


शिक्षा की अलख जगाने वाला तपस्वीः ‘सिर जाये तो जाये प्रभु, मेरो धर्म न जाये’ को जीवन मंत्र मानने वाले और शिक्षा के क्षेत्र में जीवनपर्यंत अथक व अनवरत कार्य करने वाले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रणेता महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का 12 नवंबर 1946 को निधन हो गया। देश की स्वतंत्रता के लिए अहम भूमिका निभाने वाले महामना पंडित मदन मोहन मालवीय, भारत की स्वतंत्रता से एक साल पहले ही इसकी कसक लिये संसार से विदा हो गए। 2014 में भारत सरकार की तरफ से उन्हें भारत रत्न से अलंकृत किया गया।

एक पत्रकार, अधिवक्ता, समाज सुधारक, शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महामना का जीवन क्षेत्र इतना विशाल है कि उसे शब्दों में समेटना बहुत कठिन है। महात्मा गांधी उन्हें बड़ा भाई का मान देते थे और उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय को महामना की उपाधि दी थी। गांधीजी ने मालवीय जी के बारे में कहा भी था ‘जब मैं मालवीय जी से मिला वे मुझे गंगा की धारा की तरह निर्मल व पवित्र लगे।’

मालवीय जी ने स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। वे कांग्रेस के चार बार अध्यक्ष रहे। चौरी-चौरा कांड में जब 170 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गयी तो मालवीय जी ने उनकी पैरवी कर उनमें 151 लोगों को बचाया। असहयोग आंदोलन, नमक आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 1931 में बहुचर्चित गोलमेज सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हरिद्वार में हर की पौड़ी पर गंगा आरती का आयोजन किया जो आज भी अनवरत चल रहा है। इसके अलावा कई शिक्षण संस्थाओं का संरक्षण कर शिक्षा की नयी मुहिम शुरू की जो आज विस्तृत रूप से अपनी पूरी महत्ता के साथ सामने है।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रणेता मदन मोहन मालवीय को लेकर एक किस्सा मशहूर हुआ जब वे इसके लिए चंदा इकट्ठा कर रहे थे। हैदराबाद के निजाम ने मालवीय जी को चंदा देने की बजाय दान में अपनी जूती देने की पेशकश कर दी। बेहद विनम्र और विराट हृदय के महामना निजाम की जूती ही उठाकर ले गए और उसे बाजार में नीलाम करने लगे। निजाम को जब इसकी खबर लगी तो उसे शर्मिंदगी हुई। उसने मालवीय जी को बुलाकर भारी-भरकम दान देकर विदा किया। उन्होंने इसके निर्माण के लिए 1 करोड़ 64 लाख का चंदा इकट्ठा किया। इसके लिए उन्होंने पेशावर से कन्याकुमारी तक की यात्रा की। उन्हें इस विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए 1360 एकड़ जमीन दान में मिली जिसमें 11 गांव, 70 हजार पेड़, 100 पक्के कुएं, 20 कच्चे कुएं, 40 पक्के और 860 कच्चे मकान, एक मंदिर और एक धर्मशाला शामिल था।

अन्य अहम घटनाएं:

1896: भारतीय पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिवादी सालिम अली का जन्म।

1940: अभिनेता अमजद खान का जन्म।

2012: जाने-माने समाज सुधारक लल्लन प्रसाद व्यास का निधन।

2018: भाजपा नेता व सांसद अनंत कुमार का निधन।