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सीडीएस जनरल रावत ने कहा- भारत के लिए चीन सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा


परमाणु शक्ति संपन्न दो पड़ोसियों में विश्वास की कमी सीमा विवाद सुलझाने में बाधा

 भारत जमीनी और समुद्र सीमा पर किसी भी दुस्साहस से निपटने के लिए तैयार



नई दिल्ली, 13 नवम्बर (हि.स.)। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने चीन को भारत की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। परमाणु शक्ति संपन्न दो पड़ोसियों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों में विश्वास की कमी और संदेह बाधा बनी हुई है। साथ ही उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हजारों सैनिकों और हथियारों की लंबे समय तक तैनाती की संभावना जताई। जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारत जमीनी और समुद्र सीमा पर किसी भी दुस्साहस से निपटने के लिए तैयार है।

एक मीडिया कॉन्क्लेव में जनरल रावत ने कहा कि दोनों देशों के बीच तनातनी के बाद चीनी सेना एलएसी के पास गांव बसा रही है जिसका इस्तेमाल भविष्य में चीनी फौजियों के ठिकाने के रूप में हो सकता है। सीडीएस ने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे का भारत पर असर पड़ने को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में इसके जरिए आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को अफगानिस्तान से गोला बारूद का ‘समर्थन’ मिलने की आशंका भी जताई। जनरल रावत ने कहा कि शत्रुतापूर्ण रवैया रखने वाले चीन और तालिबान के साथ पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों की वजह से भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के साथ थिएटर कमांड बनाना जरूरी हो गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन के साथ गतिरोध दूर करने को लेकर अब सैन्य स्तर पर 13 दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं लेकिन दोनों देश इस बात पर सहमत नहीं हुए हैं कि सीमा से सैनिकों की कैसे वापसी होनी है। जनरल रावत ने आशंका जताई कि हिमालयी सीमा को सुरक्षित करने के लिए पिछले साल चीन सीमा पर भेजे गए हजारों की संख्या में सैनिक और हथियार लंबे समय तक बेस पर वापस नहीं लौट सकेंगे। पिछले साल जून में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच चार दशक की सबसे घातक हिंसक झड़प के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से रणनीतिक फोकस हटाकर चीन पर केंद्रित कर दिया है। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों को जान गंवानी पड़ी थी जिसके बाद से दोनों ही देश हिमालयन सीमा पर बुनियादी ढांचे, सैनिकों और अन्य साजोसामान में इजाफा कर रहे हैं।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ गतिरोध बढ़ने के बाद चीनी सेना अपने नागरिकों या सैनिकों को बसाने के लिए एलएसी के करीब गांवों का निर्माण कर रही है। सीडीएस की यह टिप्पणी 11 नवम्बर को भारतीय विदेश मंत्रालय के उस आधिकारिक बयान के बाद आई है जिसमें कहा गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन कई वर्षों से निर्माण कार्य कर रहा है।अरुणाचल प्रदेश सहित सीमा से सटे इलाकों में सड़क और पुलों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार देश की सीमा पर होने वाली गतिविधियों का राजनयिक माध्यमों के जरिए विरोध करती आई है। भारत ने चीन के अवैध कब्जों को कभी स्वीकार नहीं किया है और आगे भी नहीं करेगा।