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कैबिनेट: 16 राज्यों के गांवों तक पहुंचेगा इंटरनेट पीपीपी मॉडल के तहत


नई दिल्ली, 30 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार ने बुधवार को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत देश के 16 राज्यों के गांवों तक भारत नेट के माध्यम से ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पहुंचाने की योजना को मंजूरी प्रदान की है। इस पर कुल 29,432 करोड़ का खर्च आएगा जिसमें 19,041 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग भारत सरकार करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दूरसंचार मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक में हुए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि मोदी सरकार का विकास मॉडल हर गांव तक बिजली, सड़क और इंफॉर्मेशन हाईवे पहुंचाने का है। पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी ने 1000 दिन में 6 लाख गांव तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पहुंचाने की घोषणा की थी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत नेट अर्थात ‘नेशनल ऑप्टिकल नेटवर्क फाइबर कार्यक्रम’ 2011 में शुरू किया गया था और उनके कार्यभार संभालने तक इसमें कुछ खास प्रगति नहीं हुई थी। उन्हें घोषित करते हुए बड़ी खुशी हो रही है कि वर्तमान में 1.5 ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद इतने बड़े स्तर पर काम करने के लिए सरकार ने अब निजी भागीदारों को भी इसमें शामिल करने का निर्णय लिया है। इनके माध्यम से 16 राज्यों के 3.61 लाख गांवों तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पहुंचाया जाएगा।

कैबिनेट की ओर से मंजूर इस योजना के 16 राज्यों में केरल, कर्नाटक, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

इसके अलावा मंत्रिमंडल ने भारत नेट को देश के सभी बसे हुए गांव तक पहुंचाने को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तौर-तरीकों पर अलग से काम करेगा।

सरकार का कहना है कि पीपीपी मॉडल के माध्यम से नई तकनीक, उच्च गुणवत्ता का सेवा स्तर, तेज नेटवर्क, संपर्क, प्रतिस्पर्धी कीमतें, विविध सेवाएं, ओटीटी सेवाएं व मल्टीमीडिया पैकेज और लगभग सभी ऑनलाइन सेवाएं उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचेगी।