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‘आरोग्य वन’ से मिलेगी औषधि गुणों से भरपूर ताजी हवा गोरखपुर में


गोरखपुर, 22 जून (हि.स.)। बाबा गोरखनाथ की धरती गोरखपुर में प्रदेश का पहला ‘आरोग्य वन’ स्थापित होगा। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग गोरखपुर ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली है। पहली जुलाई से 07 जुलाई के बीच मनाए जाने वाले ‘वन महोत्सव’ के दौरान इसकी स्थापना होगी। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद औषधीय पौधे रोपे जाने के लिए आवंटित जमीन को साफ-सुथरा किया जा रहा है। शहर के बीचोबीच 2800 वर्ग मीटर परिक्षेत्र में लगने वाले इस वन से लोगों को औषधीय गुणों से भरपूर ताजी हवा मिलेगी।
इन पौधों का होगा रोपण
आरोग्य वन में दैनिक उपयोग में आने वाले औषधीय पौधों को लगाने पर सर्वाधिक जोर है। डीएफओ अविनाश कुमार के मुताबिक आंवला, बेल, घृतकुमारी, गिलोय, नीम, सहजन, तुलसी, बबूल, कदम्ब, सेमल, शीशम, यूकेलिप्टस, आम, अमरुद, जामुन, बेर, पपीता, लीची, हरसिंगार,अर्जुन, लेमन ग्रास, कालमेघ, अश्वगंधा, नीम, एलोवेरा, हरड़, बेहड़ा, पीपल, पाकड़, बरगद आदि पौधों को लगाने की योजना है।
मिलेगी औषधीय गुणों से भरी ताजी हवा 
आरोग्य वन में लोगों को मार्निंग वॉक की छूट होगी। औषधीय पौधों के गुणों की जानकारी भी हासिल कर सकेंगे। उनके संरक्षण-संवर्धन के लिए भी प्रेरित होंगे। औषधीय गुणों से भरी ताजी हवा में सांस लेकर वे खुद को स्वस्थ्य भी रख सकेंगे।
लोगों से मिली वन विभाग को प्रेरणा 
कोरोना महामारी के दौर में लोगों का रुझान योग और औषधिय पौधों की ओर भी काफी बढ़ा है। शुद्ध हवा, पानी और पर्यावरण प्रदूषण के मसले के प्रति लोग संवेदी हुए। यही वजह कि अधिक आक्सीजन देने वाले औषधीय पौधों की बाजार में अचानक मांग बढ़ गई। तुलसी, आवला, नीबू, सरीखे पौधों को लोग अपने किचन गार्डेन और छतों पर गमलों में लगाने लगे। वन विभाग ने इसी रुझान को बनाए रखने के लिए ‘आरोग्य वन’ बनाने का निर्णय लिया। नाम भी इसे ध्यान में रखकर ही प्रस्तावित किया गया। हेरिटेज फाउंडेशन की ट्रस्टी अनुपमा मिश्र एवं रंजीता पाण्डेय ने वन विभाग की इस कोशिश को अनुकरणीय बताया है।
नजूल की भूमि पर बनेगा ‘आरोग्य वन’
जिला प्रशासन ने रेलवे बस स्टेशन रोड पर स्थित 28 सौ वर्गमीटर भूमि आरोग्य वन के लिए आवंटित की है। नजूल की इस भूमि पर कुछ माह पहले तक अवैध कब्जा था। तहसीदार सदर डॉ संजीव दीक्षित ने जिला प्रशासन के आदेश पर इस जमीन को खाली कराया था।
बोले डीएफओ
इस सम्बंध में प्रभागीय वनाधिकारी अविनाश कुमार का कहना है कि प्रदेश में पहली बार ‘आरोग्य वन’ स्थापित किया जा रहा है। इसके बाद दूसरे जिलों में भी इस तरह के आरोग्य वन स्थापित किये जायेंगे।