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कोरोना महामारी ने घटा दी जिंदगी, दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे कम जीवन प्रत्याशा


वांशिगटन, 28 सितंबर (हि.स.)। कोविड-19 वायरस के संक्रमण ने दुनिया में खौफ बढ़ाने के साथ जीवन प्रत्याशा को भी घटा दिया है। ऑक्सफोर्ड के एक अध्ययन के अनुसार कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जीवन प्रत्याशा में सबसे बड़ी कमी आई। यह पेपर इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित हुआ।

ऑक्सफोर्ड में हुए अध्ययन के अनुसार वर्ष 2020 में जीवन प्रत्याशा 2019 की तुलना में 6 महीने से अधिक कम हो गई। यह तथ्य 29 देशों में से 22 देशों के विश्लेषण सामने आया है। सैंपल लेने वाले 29 देशों में से 27 यूरोप के थे, जबकि दो अन्य देश चिली और संयुक्त राज्य अमेरिका थे।

प्रकाशित पेपर के सह-प्रमुख लेखक डॉ. रिद्धि कश्यप ने कहा कि परिणाम यह दिखाता है कि यह कई देशों के लिए कितना विनाशकारी झटका है। कोविड -19 पर अधिक शोध की जरूरत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के विश्वव्यापी प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए आगे की जानकारी और आंकड़ों को ध्यान में रखकर इसे अच्छे से समझा जा सकता है। उन्होंने अन्य देशों की सरकारों, विशेष रूप से निम्न-आय और मध्यम-आय वाले देशों से कोविड -19 से होने वाली मौतों के आंकड़ों को उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

कोविड -19 के अध्ययन से और सैंपल से यह पता चलता है कि इसके कारण अधिकांश देशों में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा महिलाओं की तुलना में अधिक कम हो गई। सबसे बड़ी कमी अमेरिकी पुरुषों के मामलों में देखने को मिली जिसमें उनकी जीवन प्रत्याशा 2019 की तुलना में 2.2 साल कम हो गई।

15 देशों में पुरुषों की जीवन प्रत्याशा में एक साल की कमी आई, जबकि ठीक इसी तरह 11 देशों में महिलाओं के जीवन प्रत्याशा में भी एक साल की कमी आई।

अध्ययन द्वारा उजागर एक बड़ा अंतर सामने यह आया कि अमेरिका में कामकाजी 60 साल से कम उम्र के लोगों में उच्च मृत्यु दर देखने को मिला। वहीं यूरोप में 60 साल से अधिक उम्र वालों में मृत्यु दर अधिक पाया गया।