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30 जून आज का इतिहास


नहीं रहे ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडियाः 30 जून 1914 को वर्सोवा में 92 वर्षीय महान स्वतंत्रता सेनानी दादाभाई नौरोजी का निधन हो गया। ‘फादर ऑफ इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल’ के नाम से मशहूर हुए दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले और महात्मा गांधी के शुरुआती राजनीतिक परामर्शदाता रहे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापकों में शामिल दादाभाई नौरोजी का जन्म 4 सितंबर 1825 को तत्कालीन बंबई में हुआ था। उन्होंने स्कॉटलैंड युनिवर्सिटी से संबद्ध एल्फिंसटन कॉलेज से गणित और प्राकृतिक विज्ञान की पढ़ाई की और 1850 में इसी संस्थान में महज 25 वर्ष की उम्र में अध्यापक नियुक्त किया गया। उस समय वहां सिर्फ ब्रिटिश प्रोफेसर ही हुआ करते थे। वह पहले भारतीय बने, जिन्हें ब्रिटेन में महत्वपूर्ण अकादमिक पद प्रदान किया गया। लड़कियों की शिक्षा के खास हिमायती नौरोजी ने 1840 के दशक में उन्होंने एक स्कूल खोला, जिसके लिए उन्हें उस समय आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा।
1855 में कामा एंड कंपनी के हिस्सेदार के रूप में दादाभाई नौरोजी पहले ऐसे व्यक्ति बने जिन्होंने ब्रिटेन में किसी भारतीय कंपनी को स्थापित किया। हालांकि तीन वर्षों बाद वहां से इस्तीफा देकर नौरोजी एंड कंपनी नामक कपास निर्यात करने वाली कंपनी स्थापित की। कपास के व्यवसायी और प्रतिष्ठित निर्यातक रहे दादाभाई नौरोजी पहले ऐसे एशियाई व्यक्ति थे, जिन्हें ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन में सांसद चुना गया। ईसाई नहीं होने के कारण दादाभाई नौरोजी ने बाइबिल के नाम पर शपथ लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें अपने धर्मग्रंथ अवेस्ता की शपथ लेने की विशेष इजाजत दी गयी। ब्रिटिश संसद में नौरोजी ने आइरिश होम रूल और भारतीयों की बदहाल स्थिति के बारे में सबसे सामने रखा। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन एक ‘शैतानी’ ताकत है, जिसने भारतीयों को गुलाम जैसी स्थिति में रखा है। उन्होंने नियम बदलने और भारतीयों के हाथों सत्ता देने के लिए कानून लाने की हिमायत की जिसकी ज्यादातर सांसदों ने अनदेखी कर दी।
दादाभाई नौरोजी ने फेमस ड्रेन थ्योरी दी जब यह दावा किया जाता था कि ब्रिटिशर्स इंडिया के भले के लिए ही सबकुछ कर रहे हैं। दादाभाई नौरोजी ने इसकी सच्चाई बताते हुए कहा कि इंडिया से कच्चा माल ले जा रहे हैं। ब्रिटेन और वहां की फैक्ट्रियों में बनाकर इंडिया में ऊंचे दाम पर बेच रहे हैं। इसलिए इंडिया में कोई फैक्ट्री नहीं लगने दे रहे। 1906 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी ने स्वराज को कांग्रेस का लक्ष्य घोषित किया, जो उस समय अपनी तरह की पहली घोषणा थी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में दादाभाई नौरोजी के योगदान को कई तरह से याद किया जाता है। मुंबई में एक सड़क का नाम दादाभाई नौरोजी रोड है और दिल्ली में नौरोजी नगर। पाकिस्तान के कराची शहर में भी एक रोड उनके नाम पर है। इसके साथ ही लंदन में भी नौरोजी स्ट्रीट है।
अन्य अहम घटनाएंः
1855ः बंगाल के भोगनादिघी में सशस्त्र संथालों ने विद्रोह का बिगुल फूंक दिया।
1934ः जर्मन तानाशाह हिटलर ने अपनी पार्टी के विरोधियों का सफाया कर दिया।
1938ः बच्चों का पसंदीदा कार्टून सुपरमैन पहली बार कॉमिक्स में नजर आया।
1947ः भारत विभाजन की घोषणा के बाद बंगाल व पंजाब के लिए बाउंड्री कमीशन के सदस्यों की घोषणा।
1962ः रवांडा और बुरुंडी स्वतंत्र हुए।
1990ः पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का विलय हुआ।
1997ः हांगकांग से ब्रिटिश हुकूमत का खात्मा।