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बिहार : मॉनसून सत्र में विप की 24 सीटें रहेंगी खाली, कल समाप्त हो रहा 20 सदस्यों का कार्यकाल


पटना, 16 जुलाई (हि.स.)। बिहार विधानमंडल का मॉनसून सत्र 26 से 30 जुलाई के मध्य संचालित होगा। इसको लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। हालांकि, बिहार विधान परिषद की 24 सीटें खाली हो जाएंगी। कुल 75 सदस्यों वाले विधान परिषद में मात्र 51 सदस्य ही रह जाएंगे।

वर्तमान में 24 एमएलसी का कार्यकाल 16 जुलाई को खत्म होने वाला है। ये वे एमएलसी हैं, जो स्थानीय निकाय (त्रिस्तरीय पंचायत) से निर्वाचित होकर विधान परिषद पहुंचे हैं। इस कारण 17 जुलाई से बिहार विधान परिषद में दलगत संख्या बदल जाएगी। इन 24 में से 4 सीटें पहले से रिक्त हैं।

इन एमएलसी का कार्यकाल हो रहा समाप्त

सोलह जुलाई को जिन एमएलसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें रजनीश कुमार, सच्चिदानंद राय, टुन्ना जी पांडेय, रीना यादव, राधाचरण साह, मनोरमा देवी, संतोष कुमार सिंह, सलमान रागिब, राजन कुमार सिंह, बब्लू गुप्ता, दिनेश प्रसाद सिंह, सुबोध कुमार, हरिनारायण चौधरी, दिलीप कुमार जायसवाल, संजय प्रसाद, अशोक कुमार अग्रवाल, नूतन सिंह, सुमन कुमार, आदित्य नारायण पांडेय और राजेश राम हैं।

इसके अलावा चार सीटें पहले से खाली हैं। रीतलाल यादव के दानापुर से विधायक बन जाने बाद से यह सीट खाली है। राजद से सीतामढ़ी एमएलसी दिलीप राय जदयू में शामिल होकर विधायक बन गए। वहीं, जदयू के एमएलसी मनोज कुमार यादव विधायक बन गए। दरभंगा से जीते भाजपा एमएलसी सुनील कुमार सिंह का निधन हो गया है।

सेवानिवृत होने वालों में सबसे अधिक एमएलसी भाजपा के

अभी भाजपा के 26 एमएलसी सदन में हैं। सबसे अधिक भाजपा के एमएलसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इस कोटे से 12 एमएलसी हैं। इनके 12 हटेंगे तो विधान परिषद में मात्र 14 एमएलसी भाजपा कोटे से रह जाएंगे। जदयू के 29 एमएलसी हैं, इनके वर्तमान में छह सदस्य स्थानीय क्षेत्र से जीत कर आते हैं जो सेवानिवृत हो जाएंगे। तब जदयू की संख्या 23 रह जाएगी। कांग्रेस के सिर्फ एक सदस्य राजेश राम पश्चिम चंपारण से चुनाव जीते थे। कांग्रेस की एक संख्या घटेगी। वहीं, राजद के दो एमएलसी जदयू में चले गए थे और एक विधायक बन गए थे तो एक एमएलसी सदन से कम होगा।

स्थानीय प्राधिकार की चार सीटों में पटना, भागलपुर-बांका, सीतामढ़ी-शिवहर और दरभंगा खाली हैं।स्थानीय क्षेत्र के इस चुनाव के वोटर पंचायत और नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। क्षेत्र के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों के साथ एमएलए-एमएलसी को भी वोट देने का अधिकार है लेकिन हार-जीत का निर्धारण पंचायतों-नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के मतों से ही होता है, क्योंकि इनकी संख्या ज्यादा होती है। एमपी-एमएलए-एमएलसी इस चुनाव में वोट देने में बहुत दिलचस्पी नहीं लेते हैं।

उल्लेखनीय है कि बिहार विधान परिषद का गौरवशाली संसदीय इतिहास रहा है। मॉर्ले-मिंटो द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार बनाए गए भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 के आलोक में 25 अगस्त, 1911 को भारत सरकार ने भारत सचिव को पत्र भेजकर बिहार को बंगाल से अलग करने की सिफारिश की, जिसका सकारात्मक उत्तर 01 नवंबर, 1911 को आया।

इंग्लैंड के सम्राट द्वारा दिल्ली दरबार में 12 दिसम्बर, 1911 को बिहार-उड़ीसा प्रांत के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त करने की घोषणा हुई और 22 मार्च, 1912 को नए प्रांत का गठन हुआ। 01 अप्रैल, 1912 को चार्ल्स स्टुअर्ट बेली बिहार एवं उड़ीसा राज्य के लेफ्टिनेंट गवर्नर बने।

लेफ्टिनेंट गवर्नर को सलाह देने के लिए इण्डियन कौंसिल ऐक्ट, 1861 एवं 1909 में संशोधन कर गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया एक्ट, 1912 द्वारा बिहार विधान परिषद का गठन किया गया, जिसमें 3 पदेन सदस्य, 21 निर्वाचित सदस्य एवं 19 मनोनीत सदस्य रखे गए। विधान परिषद की प्रथम बैठक 20 जनवरी, 1913 को पटना कॉलेज (बांकीपुर) के सभागार में हुई ।