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13 सितंबर: इतिहास के पन्नों में


…जब जवाब दे गया लौहपुरुष का धैर्य: भारत नया-नया आजाद हुआ था। दूसरी चुनौतियों के साथ 562 रियासतों को भारत के लोकतांत्रित ढांचे में लाकर देश को आकार देने का काम तेजी से चल रहा था। ज्यादातर रियासतें थोड़ी हीलाहवाली के बाद मान गईं लेकिन तीन रियासतें चुनौती थीं- जूनागढ़, कश्मीर और हैदराबाद। इनके शासक स्वतंत्र रहना चाहते थे या पाकिस्तान के साथ मिलने का उनका इरादा था। खासतौर पर हैदराबाद निजाम आसिफ खान, भारत सरकार को चुनौती देने की मुद्रा में थे। जबकि सरदार वल्लभ पटेल का साफ मानना था कि हैदराबाद का भारत में विलय नहीं हुआ तो यह एकजुट भारत के पेट में कैंसर की तरह होगा।

हैदराबाद की 85 फीसदी आबादी हिंदू थी। यहां समरकंद से आए आसफजाह की वंशावली का राज था। औरंगजेब के बाद यहां का राज उन्हें मिला था और इसे निजाम कहा जाता था। जिस समय भारत का बंटवारा हुआ उस समय उस्मान अली खान आसफजाह (सातवें) निजाम थे। उन्हें दुनिया के सबसे धनी लोगों में गिना जाता था। उसका सपना हैदराबाद को स्वतंत्र देश बनाना था और इसके लिए अपनी अलग आर्मी भी बना रखी थी। जिसमें मुस्लिम समुदाय के सैनिक थे और इन्हें रजाकार कहा जाता था। निजाम ब्रिटिश सरकार के पास भी कॉमनवेल्थ के अधीन हैदराबाद को स्वतंत्र देश बनाए जाने की मांग के साथ जा चुके थे, जिसे ठुकराया जा चुका था।

तमाम मान-मनौव्वल और विकल्पों के बावजूद हैदराबाद निजाम ने अपनी जिद नहीं छोड़ी। जैसे-जैसे हैदराबाद पर भारतीय संघ में शामिल होने का दबाव बनाया गया कासिम रिजवी के नेतृत्व में बर्बर रजाकारों ने जनता का नरसंहार करना शुरू कर दिया। निजाम ने पाकिस्तान के साथ मिलकर जब सैन्य विद्रोह का इरादा बनाया तो सरदार पटेल का धैर्य जवाब दे गया।

13 सितंबर 1948 को उन्होंने हैदराबाद को घेरने के लिए जनरल जेएन चौधरी के नेतृत्व में 36 हजार सैनिकों का काफिला भेजा, जिसे ऑपरेशन पोलो का नाम दिया गया। 108 घंटे चला यह ऑपरेशन 17 सितंबर को निजाम की 26 हजार फौज के आत्मसमर्पण से पूरा हुआ। इस दौरान निजाम ने अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से हैदराबाद के भारत में विलय को रोकने की मदद मांगी लेकिन मना कर दिया। इस सफल ऑपरेशन के बाद सरदार पटेल हैदराबाद हवाई अड्डा पर जब पहुंचे तो निजाम उनके सामने झुके हुए थे।

अन्य अहम घटनाएंः

1929ः लाहौर जेल में 63 दिनों की भूख हड़ताल के बाद क्रांतिकारी यतींद्रनाथ दास का निधन।

1947ः प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 40 लाख हिंदू व मुसलमानों के पारस्परिक स्थानांतरण की पेशकश की।

2000ः भारतीय खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने शेनयान में पहला फिडे शतरंज विश्वकप जीता।

2008ः दिल्ली के तीन स्थानों पर सिलसिलेवार बम धमाके में 19 लोगों की मौत, 90 लोग घायल।