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10 नवंबर इतिहास के पन्नों में


जब कलकत्ता ‘बेच’ दिया गया: ‘आनंद का शहर’, ‘महलों का शहर’ ‘पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार’ सहित कई दूसरे नामों से मशहूर देश के प्राचीनतम महानगरों में शामिल कलकत्ता (कोलकाता), आधुनिक भारत के इतिहास की कई गाथाएं खुद में समेटे है। उत्साह, उमंग और ऊर्जा इस शहर का चरित्र है लेकिन हुगली नदी के किनारे बसे इस ऐतिहासिक शहर ने गहन विषाद और मायूसी भरे कई दौर भी देखे हैं। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के केंद्र में रहा यह शहर कभी अंग्रेजों के हाथों बेच दिया गया था।

आधुनिक भारत के शहरों में सबसे पहले बसने वाले कलकत्ता को 10 नवंबर 1698 को ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों बेच दिया गया। दरअसल, वाणिज्यिक रूप से प्राचीनकाल से ही महत्वपूर्ण रहे कोलकाता में 1690 में ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी जाब चारनाक ने अपनी कंपनी के व्यापारियों के लिए एक बस्ती बसाने की योजना बनायी। इसके लिए 1698 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक स्थानीय जमींदार परिवार सावर्ण रायचौधुरी से तीन गांव (सूतानुटि, कोलिकाता और गोबिंदपुर) के इजारा (मुगलों द्वारा बनायी गयी राजस्व वसूली की एक व्यवस्था) लिये।

अगले साल कंपनी ने इन तीनों गांवों को प्रेसिडेंसी सिटी के रूप में विकसित करना शुरू किया। वर्ष 1727 में इंग्लैंड के राजा जार्ज द्वितीय के आदेश पर यहां एक नागरिक न्यायालय की स्थापना की गयी। आगे चलकर कोलकाता नगर निगम की स्थापना हुई।

1756 में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने कोलिकाता पर आक्रमण कर उसे जीत लिया और इसका नाम अलीनगर रखा। हालांकि साल भर बाद ही सिराजुद्दौला को अंग्रेजों ने शिकस्त दे दी। फिर 1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने इसे ब्रिटिश शासकों की भारतीय राजधानी बना दी। वर्ष 1912 तक कलकत्ता अंग्रेजों की राजधानी बनी रही।

अन्य अहम घटनाएं:

1659: छत्रपति शिवाजी ने प्रतापगढ़ किले के निकट अफजल खान को मार गिराया।

1848: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता सुरेंद्रनाथ बनर्जी का जन्म।

1885: गोटलिएब डेमलेर ने दुनिया की पहली मोटरसाइकिल पेश की।

1908: कन्हाई लाल दत्त ने देश की आजादी के लिए फांसी का फंदा चूमकर शहादत दी।

1920: राष्ट्रवादी ट्रेड यूनियन नेता और भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी का जन्म।

1920: भारत के मशहूर शिल्पकार एवं चित्रकार सदानंद बकरे का जन्म।

1990: चंद्रशेखर भारत के आठवें प्रधानमंत्री बने।

2013: राजस्थानी भाषा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार विजयदान देथा का निधन।