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हिंदू राष्ट्र निर्माण से ही बच सकती है भारतीय संस्कृति : आचार्य परमहंस


कहा,हमारे पास ऐसे 40 हजार स्थलों की है सूची

झांसी,28 मई(हि. स.)। तपस्वी छावनी के महंत आचार्य परमहंस अयोध्या शनिवार को झांसी पहुंचे। एक स्थानीय होटल में हिंदुस्तान समाचार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही देश को हिंदू राष्ट्र घोषित न किया गया तो भारतीय संस्कृति को बचाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए 2024 के पूर्व भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाए। उन्होंने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त मुस्लिम समुदाय पर जमकर हमला बोला। ज्ञानवापी से लेकर कुतुबमीनार तक सर्वे के दौरान मिले सबूतों पर उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भारतीय संस्कृति के देवी-देवताओं का मखौल उड़ाया जा रहा है, उनके ऊपर वजू करने की बात की जा रही है, यह शर्मनाक है। यदि ऐसा ही उनके पैगंबरों के साथ किया जाए तो वह कितना आहत होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अभी 40 हजार स्थलों की सूची उनके पास है। जिन्हें वापस कराया जाएगा।

आचार्य परमहंस ने कहा कि अतीत से लेकर वर्तमान तक इस्लाम के नाम मुसलमानों ने गैर मुस्लिम का जिस तरह से हिंसा की है,वह क्षम्य नहीं है। चाहे वह 16 अगस्त 1946 का डायरेक्ट एक्शन डे रहा हो, चाहे 1990 में कश्मीर की घटना या फिर गोधरा कांड से लेकर के पश्चिम बंगाल तक राजनीतिक हिंसा लक्ष्य सिर्फ गैर हिंदू को समाप्त कर देना रहा है। जो स्थिति आक्रांता मुगलों की रही,जैसे इस्लाम कबूल न करने के कारण छत्रपति संभाजी महाराज को 40 दिन तक तड़पा कर मारा था। गुरु गोविंद सिंह के बच्चों को इस्लाम कबूल न करने के चलते जिंदा दीवार में चुनवा देना, वर्तमान में लव जिहाद के नाम पर हिंदू बच्चियों को फंसा कर धर्मांतरण करवाना और गौ मांस खिलाना और जहां मुस्लिम आबादी गांव या शहर में ज्यादा हो गई है, हिंदुओं का जो पलायन हो रहा है। किसी भी हिंदू त्योहारों पर पत्थरबाजी आज भी हो रही है। इन तमाम हालातों को देखते हुए बहुसंख्यक समाज ने निर्णय लिया है कि देश का विभाजन पुनः न हो, भारतीय संस्कृति बची रहे। इसलिए भारत हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए।

राष्ट्रवादी मुस्लिम की भी मौन स्वीकृति

समाज के अच्छे मुसलमानों पर सवाल उठाते हुए पीठाधीश्वर ने कहा कि कश्मीर में पत्थर फेंके जाने के दौरान हमारे सैनिक घायल हो जाते थे या कभी-कभी वह शहीद भी हुए, उस पर जो अपने को राष्ट्रवादी मुस्लिम कहते थे, उनकी मौन स्वीकृति देखी गई। यह मौन स्वीकृति यह स्पष्ट करती है कि यदि भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बना तो यह देश को निगल जाएंगे। बहुसंख्यक समाज सबका हित चाहता है लेकिन करोड़ों निर्दोष हिंदुओं की हत्या, लव जिहाद की शिकार बेटियों,व देश की विभाजनकारी नीतियों को देखकर इस निर्णय पर पहुंचा है कि अतिशीघ्र भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो।

2024 के पूर्व भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कराने को संकल्पित

उन्होंने कहा कि वैसे भी देश का बंटवारा मुसलमानों के कहने पर हुआ था। उन्हें पाकिस्तान व बांग्लादेश मिला जो इस्लामिक देश बन चुके हैं। वहां हिंदुओं को मुस्लिम बनाने व हत्या करने को न तो भुलाया जा सकता है और न क्षमा किया जा सकता है। मुस्लिम बहुल क्षेत्र में यह स्थिति भारत में भी है। केरल जैसे क्षेत्रों में प्रथक देश की मांग उठने लगी है। 2014 के बाद मुस्लिम बदले नहीं हैं,बल्कि वर्तमान सरकार की कार्यकाल खत्म होने की प्रतीक्षा में हैं। कदाचित सत्ता बदल गई तो इसके बाद हिंदू अस्तित्व को मिटने से कोई रोक नहीं सकता। इसलिए 2024 के पूर्व भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कराने को बहुसंख्यक वर्ग संकल्पित है।

बहुसंख्यकों की आस्था आहत

ज्ञानवापी मामले से लेकर कुतुबमीनार तक के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी सर्वे में जो शिवलिंग मिला, उसको लेकर के तमाम बुद्धिजीवी मुस्लिमों द्वारा वजूखाने व फब्बारे की बात की जा रही है। इससे बहुसंख्यकों की आस्था उसी तरह आहत हो रही है। जिस तरह कोई पैगंबर मोहम्मद, कुरान या अल्लाह पर थूकने की बात करें तो मुस्लिम वर्ग आहत होगा। जिस तरह मुस्लिम अल्लाह को मानते हैं, वैसे ही बहुसंख्यकों के शिव आराध्य हैं। वह ईश्वर है।

ऐसे 40 हजार स्थलों की सूची

उन्होंने यह भी दावा किया कि जो मुगल आक्रांताओं द्वारा मंदिर तोड़े गए हैं। वे सभी एक-एक कर वापस लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ऐसे 40 हजार मंदिर तोड़े गए और उन पर मस्जिदें बनाई गई। उनकी लिस्ट उनके पास है।

तलवारों के डर से सलवार पहनने वालों को विकल्प खुला

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि दुनिया के सारे मुसलमान जानते हैं कि मक्का में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। इसके बावजूद भी हिंदू मानवता के नाते आज भी बहुत सारे तीर्थों में ऐसे स्थल हैं। जहां दुकान मुस्लिम ही लगाते हैं लेकिन जहां यह मुसलमान घुस जाते हैं, हिंदुओं को या तो बाहर निकलना पड़ता है या फिर उन्हें जबरन निकाल दिया जाता है। भारत में जितने भी मुस्लिम व ईसाई हैं, वह परिवर्तित हुए हैं। यदि वे घर वापसी करते हैं तो इनके लिए विकल्प खुला है। उन्हें सनातनी टाइटल देते हुए गीता व रामायण का पाठ करने का विकल्प है। यह अपने घर की वापसी कर सकते हैं। वरना उन्हें इस्लामिक देशों की तर्ज पर रहना होगा। उन्होंने उन लोगों को भी चेताया जो तलवारों के डर से सलवार पहनकर मुस्लिम बने हैं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि उस समय उनके पास कोई विकल्प न रहा हो, लेकिन अब तुष्टीकरण की राजनीति नहीं है। अब वे साहस के साथ घर वापसी कर सकते हैं।