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हर्षिल : कुदरत के नजारों के बीच यहां का पोस्ट ऑफिस कभी बना था फिल्मी कहानी


-राज कपूर की राम तेरी गंगा मैली की वर्ष 1985 में यहां हुई थी शूटिंग

देहरादून, 13 सितंबर। (हिस)। इन दिनों उत्तराखंड आ रहे पर्यटक बर्फबारी से पहले हर्षिल की हसीन वादियों काे जीभर के देख लेना चाहते हैं। देवदार के पेड़ों की घनी छाया और खूबसूरत पहाड़ियों के दर्शन किसी मन्नत के पूरे होने जैसा है। पर्यटक हर्षिल में एक और चीज जरूर देखना चाहते हैं और वह है दो छोटे कमरों वाला एक बहुत पुराना पोस्ट ऑफिस। अब कोई भी सोच सकता है कि आखिर इस पोस्ट ऑफिस में ऐसा क्या है, तो बताना जरूरी हो जाता है कि यहां पर ग्रेट शो मैन राजकपूर की राम तेरी गंगा मैली फिल्म के निशान मौजूद हैं। वर्ष 1985 में अपनी पूरी टीम के साथ राज कपूर ने इस गांव में शूटिंग की थी और इस पोस्ट ऑफिस पर मंदाकिनी को लेकर एक खास सीन शूट किया था।

हर्षिल इन दिनों पर्यटकों से गुलजार है। गंगोत्री धाम से करीब 30 किलोमीटर पहले हर्षिल में बरसात के बाद प्रकृति का सौंदर्य और निखरकर सामने दिखता है। दो महीने बाद बर्फबारी के लिए पूरा माहौल तैयार हो जाएगा, तो यहां के लोगों का छह महीने के लिए डुंडा, भटवाड़ी या निकटवर्ती अन्य स्थानों के लिए निकलना भी शुुरू हो जाएगा। यहां के लोगों का हमेशा का यह रूटीन यहां के गानों में भी सुनाई पड़ता है-छह महीने हर्षिल, छह महीने भटवाड़ी। हर्षिल के विभिन्न हिस्सों में राम तेरी गंगा मैली की राजकपूर ने शूटिंग की थी। अपनी चिट्ठी का इंतजार करती नायिका मंदाकिनी इस पोस्ट ऑफिस में आकर डाक बाबू से जानकारी हासिल करती है। यह सीन फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे हर्षिल के पोस्ट ऑफिस में फिल्माया गया है।

हर्षिल की छोटी-छोटी गलियों से गुजरते हुए पोस्ट ऑफिस की लोकेशन पूछते पर्यटकों को आसानी से देखा जा सकता है। पिछले साल से यह जरूर हुआ है कि उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने पोस्ट ऑफिस पर एक बड़ा सा बोर्ड लगा दिया है। इसमें मंदाकिनी और साथी कलाकार का पोस्ट ऑफिस से संबंधित सीन एक तस्वीर के रूप में डिस्प्ले किया गया है। पोस्ट ऑफिस के प्रभारी जयेंद्र कुमार बताते हैं कि वह पिछले दो सालों से यहां तैनात हैं। हर्षिल पहुंचने वाला हर पर्यटक पोस्ट ऑफिस में पहुंचकर फिल्म के बारे में जरूर बात करता है। शूटिंग के दौरान बच्चे रहेे गांव के तमाम लोग अब उम्रदराज हो गए हैं।

ऐसे ही एक ग्रामीण अतर सिंह पुरानी बातों को याद करते हैं। वह बताते हैं-उन दिनों पूरे क्षेत्र में उत्सव का सा माहौल था। राज कपूर, राजीव कपूर और मंदाकिनी को देखने और शूटिंग का अनुभव लेने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा रहता था। टीम यूनिट के लोगों ने ग्रामीणों के साथ बहुत अच्छा समय बिताया और कुछ स्थानीय लोगों को फिल्म में छोटा-मोटा काम भी दिया।