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स्वामी जीतेन्द्रानंद ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती


वाराणसी, 25 मई (हि.स.)। ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी प्रकरण में प्रतिवादी मुस्लिम पक्ष जिस प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट 1991 का बार-बार जिक्र कर सुनवाई बाधित कर रहा है। उस एक्ट के खिलाफ अब अखिल भारतीय संत समिति भी मुखर हो गई है। समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने वर्शिप एक्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह जानकारी बुधवार को पत्रकार वार्ता में स्वामी जीतेन्द्रानंद ने दी।

स्वामी जीतेन्द्रानंद ने बताया कि हमने आज सुप्रीम कोर्ट में प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट, 1991 को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी। हमने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि उपयोगी प्रतीत न होने वाले इस अधिनियम के प्रावधानों से मुक्ति दिलाई जाय। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में धर्म स्वतंत्रता के मूल अधिकारों के अंतर्गत जब हमारे धर्म पर प्रहार हुए तो एक ऐसा विधेयक लाया गया जिसे उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम नाम दिया गया। उन्होंने कहा कि हम भले ही यह कह लें कि हम स्वतंत्र देश के निवासी हैं, लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति की तिथि के पूर्व जिस गुलामी के हालात में हमारे देव स्थान थे, हम उन्हें प्राप्त नहीं कर सकते हैं। उन देव स्थानों की बेहतरी के बारे में नहीं सोच सकते हैं। हमारी संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया गया।

स्वामी जीतेन्द्रानंद ने कहा कि संसद ने एक ऐसा एक्ट पास किया कि आज उसकी दुहाई देकर कहा जाता है कि आप काशी और मथुरा पर अपना दावा नहीं कर सकते हैं। उन्होंने सवाल किया कि हम दावा क्यों नहीं कर सकते, भला यह कहां का न्याय है? इसलिए हमने इस एक्ट को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।