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स्वदेशी मिसाइल कार्वेट आईएनएस खुकरी 32 साल की राष्ट्र सेवा के बाद रिटायर


सूर्यास्त होते ही राष्ट्रीय ध्वज और नौसेना पताका उतारकर दी गई विदाई

– जहाज ने सेवा के दौरान 6,44,897 समुद्री मील से अधिक दूरी तय की
नई दिल्ली, 24 दिसम्बर (हि.स.)। स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट में से पहला जहाज आईएनएस खुकरी गुरुवार को 32 साल की शानदार सेवा के बाद रिटायर कर दिया गया। विशाखापत्तनम में आयोजित समारोह में नौसेना की परंपरा को निभाते हुए सूर्यास्त होते ही राष्ट्रीय ध्वज और नौसेना पताका उतारकर जहाज को सेवा से विदाई दी गई। पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस मौके पर जहाज के कुछ सेवारत और सेवानिवृत्त पूर्व कमांडिंग अधिकारी भी उपस्थिति रहे।
मिसाइल कार्वेट आईएनएस खुकरी को 23 अगस्त, 1989 को नौसेना में शामिल किया गया था। इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने किया था। यह जहाज पश्चिमी और पूर्वी दोनों बेड़े का हिस्सा रहा है। जहाज को मुंबई में तत्कालीन रक्षा मंत्री श्रीकृष्ण चंद्र पंत ने नौसेना के बेड़े में शामिल किया था। दिवंगत कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला की पत्नी सुधा मुल्ला और संजीव भसीन को जहाज का पहला कमांडिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया था। बाद में संजीव भसीन वाइस एडमिरल के पद से सेवानिवृत्त हुए। राष्ट्र की सेवा के दौरान जहाज की कमान 28 कमांडिंग ऑफिसरों ने संभाली। जहाज ने सेवा के दौरान 6,44,897 समुद्री मील से अधिक की दूरी तय की, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का 30 गुना के बराबर है। यह जहाज भारतीय सेना के गोरखा ब्रिगेड से संबद्ध था। गोरखा ब्रिगेड के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल पीएन अनंतनारायण ने इस समारोह में भाग लिया।

भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस खुखरी का पूरा नाम इंडियन नेवल शिप खुखरी था। इस पोत को 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 9 दिसम्बर, 1971 को पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस हेंगोर ने तारपीडो से नष्ट कर दिया था। यह जहाज दीव के समुद्र तट से 40 नॉटिकल मील की दूरी पर 18 अधिकारियों और 176 नाविकों सहित डूब गया था। जहाज के तत्कालीन कैप्टन कमांडर ऑफीसर महेन्द्र नाथ मुल्ला ने खुद को बचाने के बजाय अपने पूरे चालक दल का साथ निभाया। उन्होंने अपनी लाइफ जैकेट जूनियर अधिकारी को देकर सभी साथियों के साथ जहाज से उतर जाने का आदेश दे दिया। बाद में कैप्टन मुल्ला को मरणोपरांत महाबीर चक्र से सम्मानित किया गया था। जहाज के दोनों कमांडरों मनु शर्मा और लेफ़्टिनेंट कुंदनमल को देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार मिला था।
आईएनएस खुखरी की जल समाधि के बाद भारतीय नौसेना ने 48 घंटों के भीतर ही कराची के बंदरगाह पर कब्जा करके बदला ले लिया था। इन सभी बहादुर योद्धाओं की शहादत की स्मृति में दीव में एक स्मारक स्थापित किया गया है। यह स्मारक समुद्र के सामने एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इस स्मारक के पास में ही कांच में आईएनएस खुखरी के एक छोटे से मॉडल को रखा गया है। इस स्मारक का उद्घाटन भारतीय नौसेना के तत्कालीन कमांडिग-इन-चीफ फ्लैग ऑफीसर वाइस एडमिरल माधवेन्द्र सिंह ने 15 दिसंबर, 1999 को किया था। इसी आईएनएस खुखरी में नाम को जिन्दा रखने के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने मिसाइल कार्वेट आईएनएस खुकरी का निर्माण किया था।