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सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन” सेमिनार में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा- प्रधानमंत्री मोदी का विजन सारे विश्व के लिए प्रासंगिक- अमिताभ कांत


नई दिल्ली, 22 फरवरी (हि.स.)। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत जलवायु परिवर्तन को रोकने के बहुआयामी प्रयास कर रहा है। उनका प्रकृति की संभाल को लेकर विजन सारे विश्व के लिए प्रासंगिक है।
“सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन” के 9वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दो दिवसीय आयोजन में होटल ली मेरिडियन में जलवायु परिवर्तन की “चुनौतियों और अवसरों” पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें देशभर के प्रमुख विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने अपने उद्बोधन में बताया कि कैसे हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक वाहन, पर्यावरण सामाजिक और शासन (ईएसजी) तथा जैव ईंधन भारत को जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करेंगे। यह भविष्य में हरित पर्यावरण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “पंचामृत” विजन का हिस्सा है। यह सारे विश्व के लिए भी प्रेरणादायक भी है। भारत में अक्षय ऊर्जा की सबसे कम उत्पादन लागत है और इसका लाभ उठाकर भारत हरित हाइड्रोजन में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। सरकार और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी), विभाग ने बहुत सारे नवाचारों मदद की है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए लगभग तीन अरब अमेरिकी डॉलर का अलग बजट आवंटित किया गया है।
“सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन” के संस्थापक अध्यक्ष सी ए दीनदयाल अग्रवाल ने अपने स्वागत भाषण में हरित ऊर्जा के भविष्य के लिए फाउंडेशन की प्रतिबद्धता और देश के लिए ऊर्जा की मांग को नया रूप देने वाले नए नवाचारों के सभी पहलुओं पर अपने विचार प्रकट किए।
उन्होंने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड, भारत सरकार को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, रिलैक्सो, गेल, एनएचपीसी यूआरएस वेरिफिकेशन लिमिटेड, ईएसजी रिसर्च फाउंडेशन को उनके योगदान और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। राजेश कुमार पाठक सचिव प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड भारत सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन फील्ड में काम कर रहे उद्योगों और स्टार्ट-अप को सभी तकनीकी सहायता और यहां तक कि वित्तीय सहायता का आश्वासन दिया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त सचिव जिग्मेट टपका ने पर्यावरण मंत्रालय की राय दी है और उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि लद्दाख क्षेत्र में उत्पादित अक्षय ऊर्जा का उपयोग हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने और इसे देश के उपयोग के लिए परिवहन के लिए कैसे किया जा सकता है। यहां तक कि दूसरे देश को एक्सपोर्ट भी किया जा सकता है।
यह आयोजन केंद्र सरकार की पहल के बाद “सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन” की उल्लेखनीय पहल है। भारत सरकार ने 17 फरवरी 2022 को अपनी राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति शुरू की।
एच.एन.शर्मा सचिव युवा भारती ट्रस्ट व (पूर्व सलाहकार प्रधानमंत्री स्व चन्द्र शेखर जी) पंकज सोम चतुर्वेदी, सीए गोपाल कृष्ण अग्रवाल निदेशक बीपीसीएल और प्रवक्ता भाजपा भी उपस्थित थे।
सत्र का संचालन वेद प्रकाश महावर ओएनजीसी के पूर्व निदेशक और सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष ने किया। इस अवसर पर नेशनल एक्सप्रेस प्रकाशन समूह के सीईओ वेंकटेश गुप्ता भी उपस्थित थे ।