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सीएम के शिलान्यास के नौ वर्ष बाद भी नहीं बना अस्पताल, भूमिदाता ने लगाई जमीन वापसी की गुहार


बेगूसराय, 24 मई (हि.स.)। एक ओर जमीन के अभाव में अस्पताल और विद्यालय भवन निर्माण में बाधा आ रही है तो वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार के अधिकारी की उदासीनता के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना भी धराशाई हो गया है।

मामला केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के संसदीय क्षेत्र बेगूसराय का है। जहां कि अस्पताल की जमीन वर्षों से अतिक्रमित है, लेकिन भूमि दाता की गुहार लगाए जाने के बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। अतिक्रमण मुक्त नहीं कराए जाने के कारण मुख्यमंत्री द्वारा किए गए शिलान्यास के नौ वर्ष बाद भी अस्पताल का भवन निर्माण शुरू नहीं हो सका है। डीएम भी बराबर बैठक में अधिकारियों को अतिक्रमण मुक्ति के लिए एक्शन चलाने का निर्देश देते रहे हैं, परंतु अधिकारी कुछ सुनने को तैयार नहीं है। अब हालत यह हो गई है कि अतिक्रमण मुक्त नहीं कराए जाने से परेशान होकर भूमि दाता ने डीएम से अस्पताल के लिए दी गई अपनी जमीन वापस करने की मांग की है।

बेगूसराय जिला के उत्तरी सीमा पर अवस्थित गढ़पुरा निवासी भूमि दाता परिवार के सुशील सिंघानिया ने डीएम को आवेदन देकर पूर्वजों द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गढ़पुरा के लिए दी गई जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा ऐसा नहीं होने पर जमीन वापस दिलाने की गुहार लगाई है। सुशील सिंघानिया ने बताया कि मेरी दादी माली देवी ने गढ़पुरा में उस समय उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने के लिए जमीन दिया था, जो दशक पूर्व ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बन चुका है। लेकिन दी गई जमीन में से दो बीघा चार कट्ठा सात धूर जमीन वर्षों से लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है।

इस संबंध में कई बार गढ़पुरा के अंचलाधिकारी को अतिक्रमण मुक्त कराने का आवेदन दिया, धरना प्रदर्शन किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब अंचल अधिकारी द्वारा कहा जा रहा है कि पीएचसी का सरकारी जमीन नहीं है, हम खाली नहीं कराएंगे। मेरे पास जमीन का कागज नहीं है, आपका जमीन है आप खाली करा लीजिए। इतने महत्वपूर्ण कार्य को पदाधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। हमारे पूर्व मान प्रतिष्ठा और सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते रहे हैं। गढ़पुरा रेलवे स्टेशन बनाने के लिए दादा उदमीलाल सिंघानिया ने काफी संघर्ष किया और स्टेशन बनवाया। गढ़पुरा में पीएचसी एवं मवेशी अस्पताल बनाने के लिए अपनी कीमती जमीन दे दी, लेकिन आज समाज और सिस्टम दोनों उदासीन है। भूमि दाता मारवाड़ी समाज अधिकारियों से गुहार लगा रही है, लेकिन उसके बावजूद कोई सुनने वाला नहीं है।

उन्होंने बताया कि हम गढ़पुरा के लोग अपने ऐतिहासिक विरासत को संजोए रखने के लिए गढ़पुरा नमक सत्याग्रह पदयात्रा करते हैं, लोगों को जगाते हैं, लेकिन सिस्टम ना सुनने के लिए तैयार है और ना जागने के लिए तैयार है। हम मारवाड़ी समाज ने गढ़पुरा में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए प्रखंड मुख्यालय में तीन बीघा जमीन देने की घोषणा की, इस पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। 2017 में नमक सत्याग्रह नमन यात्रा पर आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गढ़पुरा पीएचसी को अपग्रेड कर 30 बेड वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था। लेकिन जमीन अतिक्रमण के कारण भवन निर्माण हो नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री के शिलान्यास के नौ वर्ष बाद भी जब इस और पहल नहीं हो रही है तो शासन-प्रशासन हमारी जमीन वापस कर दे।