Sun. May 22nd, 2022

संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का निधन


नई दिल्ली/मुंबई, 10 मई (हि.स.)। मशहूर संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का आज दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे और किडनी से संबंधित बीमारी से जूझ रहे थे।

पंडित शिवकुमार शर्मा के निधन की जानकारी गीतकार यतीन्द्र मिश्रा ने सोशल मीडिया के जरिये दी है। यतीन्द्र शर्मा ने पंडित शिवकुमार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, ‘संगीत संसार के लिए बड़ा आघात ! पंडित शिवकुमार शर्मा जी के निधन से शुद्धतावादी वाद्य कला का एक युग समाप्त..मन बहुत खिन्न है, एक एक करके हमारे सारे मूर्धन्य जा रहे हैं विनम्र श्रद्धांजलि!’

13 जनवरी, 1938 को जम्मू में जन्में पंडित शिवकुमार शर्मा के पिता पं. उमादत्त शर्मा भी जाने-माने गायक थे। संगीत के प्रति गहरा लगाव उन्हें अपने पिता से विरासत में मिला और पांच साल की उम्र में पं. शिवकुमार शर्मा ने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। उन्होंने अपने पिता से सुर साधना और तबला दोनों की शिक्षा ग्रहण की। 13 साल की उम्र में उन्होंने संतूर सीखना शुरू किया। संतूर जम्मू-कश्मीर का लोक वाद्ययंत्र था, जिसे इंटरनेशनल फेम दिलाने का श्रेय पं. शिवकुमार को ही जाता है।

पंडित शिवकुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत को पहचान दिलाई। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में पंडित शिवकुमार शर्मा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1955 में महज 17 साल की उम्र में पं. शिवकुमार शर्मा ने मुंबई में संतूर वादन का अपना पहला शो किया। इसके बाद उन्होंने संतूर के तारों से दुनिया को संगीत की एक नई आवाज से वाकिफ कराया। इसके साथ ही शिवकुमार ने फिल्म जगत में भी अपनी प्रतिभा का लोह मनवाया।

उन्होंने बांसुरी के दिग्गज पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के साथ मिलकर ‘सिलसिला’, ‘लम्हे’ और ‘चांदनी’ जैसी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया था। इन दोनों की जोड़ी को शिव-हरी के नाम से जाना जाता है। पंडित शिवकुमार का निधन भारतीय संगीत जगत के एक अध्याय का अंत होने के समान है। संगीत जगत में दिए गए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।