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शिक्षाविद और प्रोफेसर एलिस इवांस ने डीसीडब्ल्यू का कामकाज देखा


नई दिल्ली, 05 अगस्त (हि.स.)। हार्वर्ड विश्वविद्यालय और किंग्स कॉलेज लंदन में शिक्षाविद् और प्रोफेसर एलिस इवांस ने गुरुवार को दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) का दौरा किया । डीसीडब्ल्यू के कामकाज के बारे में सुनने के बाद उन्होंने डीसीडब्ल्यू के काम का अध्ययन करने के लिए कार्यालय का दौरा किया था।

उन्होंने डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के साथ राजधानी में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों और इससे निपटने के लिए डीसीडब्ल्यू द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बातचीत की।

उन्होंने आयोग के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे 181 महिला हेल्पलाइन, रेप क्राइसिस सेल, क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर, महिला पंचायत और अन्य के कार्यों का अध्ययन किया। वह 181 महिला हेल्पलाइन के कामकाज से हैरान थीं, जहां प्रतिदिन लगभग दो हजार से चार हजार कॉल आती है। डीसीडब्ल्यू के पास इन कॉल पर कार्रवाई करने के लिए एक बैक एंड सपोर्ट भी है जिसमें 23 कार और 66 ऑन ग्राउंड काउंसलर की टीम शामिल हैं, जो पीड़िताओं तक पहुंचते हैं और उनकी मदद करते हैं।

इसके अलावा डीसीडब्ल्यू ने एक फीडबैक तंत्र भी रखा है जिसके द्वारा से सभी शिकायतकर्ता महिलाओं और बच्चियों को फोन करके यह पता लगाया जाता है कि 181 हेल्पलाइन पर बाद जो टीम उनसे मिलने गई थी, उन्होंने उनकी पर्याप्त सहायता की थी या नहीं।

प्रोफेसर इवांस ने डीसीडब्ल्यू के काम पर बधाई दी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर नियंत्रण के लिए आयोग में प्रभावी शोध करने के लिए सहयोग करने में रुचि व्यक्त की। स्वाति मालीवाल ने राजधानी में आने वाली कई समस्याओं पर चर्चा की और एलिस इवांस से महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराधों से निपटने में दुनिया भर की सरकारों द्वारा अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रिआओं के बारे में उनके अनुभव मांगे।

वहीं, प्रोफेसर एलिस इवांस ने कहा, “डीसीडब्ल्यू में बेहतरीन व्यवस्था, महिलाएं 181 हेल्पलाइन पर संपर्क करती हैं, काउंसलर महिलाओं को पुलिस के पास ले जाती हैं और न्याय के लिए दबाव डालती हैं। 181 फिर शिकायतकर्ता को यह पूछने के लिए वापस फोन करता है कि क्या उसकी समस्या हल हो गई है ? व्यवस्था के हर कदम पर जवाबदेही तय होती है!”

स्वाति मालीवाल ने कहा, “एलिस इवांस जी लैंगिक मुद्दों पर बहुत संवेदनशील हैं। उन्होंने आयोग की प्रणालियों का विस्तार से अध्ययन किया और दिल्ली में महिलाओं और लड़कियों की मदद के लिए आयोग द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की अत्यधिक सराहना की। मेरी उनके साथ बहुत ही आकर्षक बातचीत हुई और मैं आशा करती हूँ कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराध के साथ-साथ उनके कल्याण से संबंधित विषयों पर संयुक्त हम एक संयुक्त शोध करेंगे।”