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वाराणसी के रविदास मंदिर में नतमस्तक हुए राहुल और प्रियंका


वाराणसी, 16 फरवरी (हि.स.)। ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का कालजयी संदेश देने वाले संत शिरोमणि गुरु रविदास के जयंती समारोह में बुधवार को कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एक साथ शामिल हुए। गुरु की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर पहुंचे भाई-बहन ने गुरु मंदिर में संत रविदास की प्रतिमा के समक्ष माथा टेका। दोनों नेताओं ने रविदासी धर्म प्रमुख डेरा सचखंड बल्ला के गद्दीनशीन संत निरंजन दास से आशीर्वाद लिया और उनका हालचाल जाना। इसके बाद दोनों नेताओं ने लंगर छका और सत्संग में शामिल हुए।
राहुल गांधी ने लंगर का प्रसाद ग्रहण करने के बाद वहां सेवा भी की। उन्होंने रैदासी परम्परा का पालन करते हुए सिर पर रुमाल रख पंगत को प्रसाद छकाया। राहुल का सेवाभाव देख पंगत में प्रसाद ग्रहण करने वाले श्रद्धालु भी गदगद दिखे। प्रियंका गांधी महिला सेवादारों से भी मिलीं। प्रियंका ने कहा कि वह हर साल यहां गुरु दरबार में आती हैं। इस साल और भी अच्छा लगा। क्योंकि मेरे साथ भैया (राहुल) भी आए हैं। उन्होंने जयंती समारोह में भाग लेने आए श्रद्धालुओं का अभिवादन कर शुभकामनाएं भी दीं। इसके पहले राहुल ने दरबार में आने के पहले ट्विटर पर लिखा, जाति-जाति में जाति हैं जो केतन के पात, रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात। प्रियंका गांधी ने भी यहां आने से पहले ट्विटर पर लिखा, हर साल की तरह आज के दिन वाराणसी स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली पर माथा टेकूंगी। आज भाई के साथ जाने में और भी खुशी हो रही है।
मंदिर परिसर में आने पर संत निरंजन दास और अन्य संतों ने दोनों नेताओं का स्वागत किया। दोनों भाई-बहन को लेकर रैदासी भक्तों ने भी उत्साह दिखाया। लोगों का प्रेम देख राहुल और प्रियंका भी हाथ जोड़कर मुस्कराते हुए उनका अभिवादन करते रहे।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी गुरु रविदास की जयंती की पूर्व संध्या पर उनके जन्मस्थान सीर गोवर्धनपुर में अपने दौरे की यादों को ट्वीट कर साझा किया था। प्रधानमंत्री ने लिखा था, मुझे संत रविदास जी की पवित्र स्थली को लेकर कुछ बातें याद आ रही हैं। साल 2016 और 2019 में मुझे यहां माथा टेकने और लंगर छकने का सौभाग्य मिला था। एक सांसद होने के नाते मैंने ये तय कर लिया था कि इस तीर्थस्थल के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। संत रविदास ने जिस प्रकार से अपना जीवन समाज से जात-पात और छुआछूत जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए समर्पित कर दिया, वो आज भी हम सबके लिए प्रेरणादायी है।
इसके पहले पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आप सांसद संजय सिंह भी संत रविदास मंदिर में नतमस्तक हो चुके हैं।