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रामचरित मानस ग्रंथ के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास के जन्म दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन


बेतिया, 04 अगस्त(हि.स.)। सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में विश्व को रामचरित मानस के रूप में अनुपम, अद्भुत ग्रंथ देने वाले गोस्वामी तुलसीदास के जन्म दिवस पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया । जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों बुद्धिजीवी एवं छात्र छात्राओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय पीस एंबेस्डर सह सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद अधिवक्ता डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल चांसलर प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय झारखंड डॉ शाहनवाज अली अमित कुमार लोहिया वरिष्ठ अधिवक्ता शंभू शरण शुक्ल सामाजिक कार्यकर्ता नवीदूं चतुर्वेदी ने संयुक्त रुप से कहा कि संवत 1554 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन तुलसीदास का जन्म हुआ था। यह तिथि इस बार आज 4 अगस्त को है। तुलसी दास जी ने अपने जीवन में अनेकों पुस्तकों की रचना की किंतु भगवान श्री राम के जन्म से राज्याभिषेक तक की घटनाओं को दोहा, चौपाई एवं छंद के माध्यम से महाकाव्य के रूप में लिख कर आम जनमानस को एक श्रेष्ठ पुत्र, पितृभक्त, मातृभक्त, भाईयों के प्रति प्रेम, पत्नी के प्रति समर्पित, दुष्टों के संहारक, मर्यादा के पर्याय राजा, आदर्श पति बनने की सीख दी।

स्वामी नरहर्यानन्द जी ने उनका नाम रामबोला रखा और अयोध्या में संवत 1561 में माघ शुक्ल पंचमी के दिन यज्ञोपवीत कराया. बिना सिखाए ही रामबोला ने गायत्री मंत्र का उच्चारण किया तो सब लोग चकित रह गए. रामबोला गुरुमुख से सुनी हुई बात एक बार में याद कर लेते थे. सोरों में स्वामी नरहरि जी ने उन्हें राम चरित सुनाया. काशी में शेष सनातन जी के सानिध्य में रह कर तुलसीदास ने 15 वर्षों तक वेद वेदांग का अध्ययन किया. लोकवासना जाग्रत होने पर वह गुरु की आज्ञा से जन्मभूमि राजापुर लौट आए. यहीं पर उनका विवाह हुआ। तुलसीदास जी काशी से अयोध्या आ गए और संवत 1631 में रामनवमी के दिन राम चरित मानस की रचना शुरू की. दो वर्ष सात माह और 26 दिनों में ग्रंथ की समाप्ति 1633 में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष में राम विवाह के दिन हुई जब से सातो कांड लिख सकेसके।