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मोदी सरकार से मिथिला मखाना को जीआई टैग बनेगा किसानों की समृद्धि का आधार


बेगूसराय, 21 अगस्त (हि.स.)। पग-पग पोखर, मांछ (मछली) और मखान के लिए चर्चित मिथिलांचल के विश्व प्रसिद्ध उत्पाद मखाना को भारत सरकार से जीआई टैग मिल गया है। भारत सरकार द्वारा मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद उत्पादक किसानों ने खुशी की लहर फैल गई है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार दस गुना से अधिक बढ़ने की संभावना है।

नए किसानों को भी मखाना ने आकर्षित कर लिया है। मिथिलांचल के प्रमुख अंग बेगूसराय में भी किसानों का मखाना की ओर झुकाव था, अब उम्मीद है कि बेगूसराय में भी दो हजार एकड़ से अधिक में मखाना की खेती होगी। बेगूसराय में मखाना की खेती के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक जगह है बिहार का एकलौता रामसर साइट काबर। जहां कि हजारों एकड़ जमीन सालों भर पानी लगा रहता है, चंद्रभागा नदी बहाव के अभाव में मृतप्राय हो चुकी है। इसके अलावे सैकड़ों पोखर मखाना उत्पादन की राह आसान करेंगे।

काबर के किसान रामप्रवेश सिंह, विपिन सिंह, मुकेश यादव एवं सूलो यादव आदि ने बताया कि बेगूसराय में मखाना उत्पादन की व्यापक संभावना है। अब जब मोदी सरकार ने हमारे मिथिला के मखान को जीआई टैग दे दिया है तो हम भी दुनिया भर में चर्चित हुए मखाना का उत्पादन करेंगे। मीठे जल के लिए एशिया भर में प्रसिद्ध हमारा काबर दुनिया को मखाना उत्पादन में एक नई दिशा दे सकता है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र कुमार बताते हैं कि देशभर में करीब 20 हजार हेक्टेयर में मखाना की खेती होती है, जिसमें 90 प्रतिशत उत्पादन अकेले बिहार में होता है तथा यह दुनिया में मखाना का सबसे बड़ा उत्पादक है।

आंकड़ा के अनुसार बिहार में प्रतिवर्ष एक लाख टन बीज मखाना का उत्पादन होता है, जिसमें से 40 हजार टन लावा प्राप्त होता है। लंबे समय से बिहार के मिथिलांचल में बड़े स्तर पर इसकी खेती होती है तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा दरभंगा में राष्ट्रीय मखाना शोध संस्थान की स्थापना के बाद मखाना की खेती मिथिलांचल से निकलकर सीमांचल और अंग प्रदेश तक पहुंच चुकी है। मौजूदा समय में बिहार के मखाना प्रति वर्ष एक हजार करोड़ का कारोबार करता है तथा मिथिला के मखाना की मांग भारत के विभिन्न हिस्सा ही नहीं, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, यूरोप, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान तक है। जीआई टैग मिलने से अब किसानों को अपने द्वारा उत्पादित मखाना विदेश भेजने में अधिक परेशानी नहीं होगी।

उम्मीद है कि भारत सरकार से जीआई टैग मिलने के बाद कारोबार में दस गुना तक की वृद्धि होगी और कारोबार दस हजार करोड़ को पार कर जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार मिलेगी, बड़ी-बड़ी कंपनियां मिथिला का रूख करेगी तो लाखों किसानों को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि जैविक, ग्लूटेन मुक्त और पोषण मूल्य के कारण सुपरफूड मखाना एक औषधि की तरह है। जिसमें 78 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट और दस प्रतिशत प्रोटीन सहित कई खनिजों से समृद्ध है। मिथिला के किसान पारंपरिक फसलें छोड़कर मखाना की खेती अपना रहे हैं। मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार पहले से ही फ्री में बीज और खेती के अनुदान दे रही है, जीआई टैग मिलने से अब बड़ी संख्या में किसानों का रुझान इस ओर जाएगा।

कृषि अनुसंधान परिषद के मखाना शोध संस्थान के एक अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि यदि किसान केवल मानसून की बारिश पर निर्भर रहें, तब भी मखाना की खेती लाभदायक हो सकती है। बिहार सरकार भी मखानख की खेती को बढ़ावा दे रही है। परंपरागत रूप से मखाना को तालाब एवं नम जमीन में बोया जाता था, लेकिन अब तराई क्षेत्रों को भी मखाना उत्पादन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, मखाना की करीब 60 प्रतिशत बुआई अब तराई क्षेत्र में हो रही है। खेती-किसानी से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता से परंपरागत खेती में लाभ कम रहा है। ऐसे में किसान अपने निचली जमीन पर मखाना की खेती करें तो यह उनके आर्थिक समृद्धि के लिए वरदान साबित हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि मखाना को जीआई टैग दिलाने के लिए बिहार सरकार बीते कुछ वर्षों से प्रयास कर रही थी। लेकिन पिछले वर्ष बिहार सरकार ने इसे बिहार मखाना का नाम देकर जीआई टैग दिलाने की कोशिश की, जबरदस्त विरोध होने पर बिहार सरकार को चुप रहना पड़ा। अब नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मिथिलांचल के किसानों के सपनों को उड़ान देने में अहम भूमिका रखने वाले मिथिला मखाना को जीआई टैग दे दिया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मखाना ग्रामीण और गांव की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ रोजगार उपलब्ध करा रहा है। मिथिला के मखाना की मांग देश से विदेश तक के बाजार में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर प्रयास कर रही है तो मिथिला मखाना को जीआई टैग, रोजगार और स्थानीय स्वरोजगार को नई गति देगा।