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मनरेगा श्रमिकों के आजिविका में वरदान साबित होगा केंद्र सरकार का ”उन्नति” : गिरिराज सिंह


बेगूसराय, 27 मार्च (हि.स.)। मनरेगा लाभार्थियों के कौशल ज्ञान को उन्नत कर आजीविका में सुधार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया प्रोजेक्ट ”उन्नति” पूर्णकालिक रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कारगर कदम साबित हो रहा है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने बताया कि 18 से 45 वर्ष के एक वयस्क सदस्य, जिसने मनरेगा के तहत एक सौ दिनों के काम को पूरा किया है, उसे उन्नति के तहत प्रशिक्षित किया जाता है। तीन सौ करोड़ की लागत से दो लाख लोगों का प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है तथा अब तक 18 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षित कर 14-15 हजार रुपया महीना कमाने के लिए सशक्त किया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट को ग्रामीण विकास मंत्रालय का स्किलिंग डिविजन, मनरेगा डिविजन और कृषि मंत्रालय के केवीके के कन्वर्जेन्स से किया जा रहा है। ट्रेंड होने वाले लाभार्थी नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के मापदंडों पर भी योग्य होते हैं।

उन्नति के तहत देशभर में एक हजार से अधिक जगहों पर बीकीपिंग, क्वालिटी सीड उत्पाद, डेयरी, ऑर्गेनिक खेती, नर्सरी, वर्मी कम्पोस्ट, मशरूम खेती, मेडिसनल प्लांटेशन, कृषि मशीन ऑपरेटर, फ्लोरिकल्चर, एक्वाकल्चर, पशु हेल्थ वर्कर, हैचरी, स्वाइल एवं वॉटर टेस्टिंग तथा पोल्ट्री के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जा रहा है। गिरिराज सिंह ने बताया कि मनरेगा के परियोजना उन्नति के 75 प्रशिक्षित उम्मीदवारों को आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में सम्मानित किया जा रहा है। प्रशिक्षित उम्मीदवार अपना अनुभव साझा करेंगे कि कैसे उन्नति प्रशिक्षण ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया तथा जीवन जीने के लिए एक नया स्थायी आजीविका का अवसर दिया।

उन्होंने बताया कि उन्नति के 75 प्रशिक्षित उम्मीदवारों के साथ-साथ, उन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के आरएसईटीआई (आरसेटी) से जुड़े बैंकरों को भी सम्मानित करेंगे, जिन्होंने परियोजना उन्नति के उम्मीदवारों के प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने में योगदान दिया है और उन्हें कमाई का एक नया कुशल माध्यम उपलब्ध कराया। ”उन्नति” एक कौशल परियोजना के रूप में मनरेगा लाभार्थियों के कौशल ज्ञान को उन्नत करने और उनकी आजीविका में सुधार करने का उद्देश्य रखती है। ताकि वे वर्तमान आंशिक रोजगार से पूर्णकालिक रोजगार की ओर बढ़ सकें तथा मनरेगा पर उनकी निर्भरता कम हो सके। यह परियोजना स्वरोजगार या मजदूरी रोजगार के लिए कौशल प्रदान करके जरूरतमंद मनरेगा लाभार्थियों की आजीविका में सुधार कर रही है तथा अब तक 18 हजार एक सौ 66 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।

जिस परिवार से प्रशिक्षण के लिए चयन किया जाता है, उन्हें मनरेगा के तहत एक सौ दिनों का रोजगार प्रदान करना जारी है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले को संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में प्रचलित मजदूरी दर के अनुसार अधिकतम एक सौ दिनों की अवधि के लिए मजदूरी का भुगतान किया जाता है तथा पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती है। 26 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में तीन वर्ष की अवधि में इस परियोजना के तहत दो लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।