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मतांतरण के लिए फंडिंग के आरोपों में घिरे बिशप पीसी सिंह के तार कोलकाता से भी जुड़े


-चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप पीसी सिंह के जबलपुर स्थित कई ठिकानों पर पड़े थे छापे

(नोट- मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ध्यानार्थ)

कोलकाता, 10 सितंबर (हि.स.)। मतांतरण के लिए फंडिंग के आरोपों में घिरे द बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप पीसी सिंह के तार कोलकाता से भी जुड़े हैं। मध्य प्रदेश की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) और उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच के दायरे में आए पीसी सिंह के करीबियों की लंबी फेहरिस्त कोलकाता में भी मौजूद है। यहां के मौजूदा बिशप से लेकर महानगर के मौलाली इलाके में स्थित एक मशहूर मिशनरी स्कूल के प्रिंसिपल, पीसी सिंह के बेहद खास रहे हैं। आरोप है कि कोलकाता से हवाला के जरिए करोड़ों रुपये की खेप पीसी सिंह तक पहुंचाई गई है।

एक दिन पहले पीसी सिंह के जबलपुर (मप्र) स्थित आवास और ठिकानों पर ईओडब्ल्यू की छापेमारी में महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे। इस आधार ईओडब्ल्यू मतांतरण के लिए फंडिंग का पता लगा रहा है। सूत्रों के मुताबिक ईओडब्ल्यू की जांच पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी नजर बनी हुई है। वहां से बरामद हो रहे दस्तावेजों की जांच ईडी के अधिकारियों ने शुरू कर दी है। खास बात यह है कि कोलकाता में पीसी सिंह से जुड़े जो लोग हैं उनकी अकूत संपत्ति भी जांच के दायरे में है। एक सामान्य से स्कूल के प्रिंसिपल की संपत्ति करोड़ों में है।

दरअसल, ईओडब्ल्यू ने जबलपुर में पीसी सिंह के खिलाफ जो जांच की है उसमें उसके घर से एक करोड़ 65 लाख रुपये नकद, 18 हजार अमेरिकी डॉलर, ब्रिटेन की मुद्रा और कई गैर कानूनी संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हो चुके हैं। इसके अलावा 48 बैंक पासपोर्ट भी मिले हैं जिसमें हुए ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। दावा है कि उसमें देश के दूसरे राज्यों के साथ पश्चिम बंगाल से भी रुपये भेजे गए हैं।

जबलपुर में छापेमारी के बाद ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक देवेंद्र प्रताप सिंह राजपूत ने बताया था कि शिकायत मिलने के बाद बिशप के ठिकाने पर दबिश दी गई थी। जहां से पता चला है कि उसने इंक्रिप्टेड डॉक्यूमेंट बनाया था और मूल सोसाइटी का नाम बदलकर उसका चेयरमैन बन गया था। देशभर में उससे मिशनरीज के लोग जुड़े हैं जो गैरकानूनी तरीके से छात्रों से ली जाने वाली फीस को गबन कर गैरकानूनी कार्यो में लगाते रहे हैं। इन पर कर चोरी, फर्जी दस्तावेज बनाने, जमीन गबन करने और मतांतरण के भी आरोप हैं।

सूत्रों ने बताया कि देशभर में बिशप के खिलाफ कुल 99 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से मध्यप्रदेश में चार, छत्तीसगढ़ में तीन, महाराष्ट्र में 11, पंजाब में छह, हरियाणा में एक, उत्तर प्रदेश में 42, राजस्थान में 24, राजधानी दिल्ली में तीन और पश्चिम बंगाल में एक मामला दर्ज है। सभी राज्यों की पुलिस से इस बारे में संपर्क साधा गया है और जांच में सामने आए तथ्यों को खंगाला जा रहा है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के हजरतगंज में क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रधानाचार्य राकेश कुमार चत्री की ओर से हजरतगंज थाने में शिकायती पत्र सौंपा गया था। इसकी जांच में भ्रष्टाचार उजागर हुए। जिस समय भ्रष्टाचार हुआ था उस समय पीटर बलदेव बिशप थे। जैसे ही उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए, तत्कालीन चर्च आफ नॉर्थ इंडिया के पदाधिकारियों ने पीटर बलदेव को बिशप के पद से हटा दिया था। अब कोलकाता पर खास तौर पर निगाह बनी हुई है। इसकी वजह है कि पीसी सिंह फिलहाल फरार हैं। दावा किया जा रहा है कि वह जर्मनी या वहां से दुबई भाग गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर जबलपुर की ईओडब्ल्यू की टीम कोलकाता भी आ सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता में पीसी सिंह से जुड़े लोगों की सूची तैयार की जा रही है जिसमें कुछ बड़े स्कूलों के प्रिंसिपल, वर्तमान बिशप और उनके सहयोगी रहे लोग शामिल हैं। ये लोग पीसी सिंह से लगातार संपर्क में रहे हैं और विभिन्न मंचों पर सिंह के साथ उनकी तस्वीरें मौजूद हैं। इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए कोलकाता के मौजूदा बिशप से फोन पर कई बार संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मौलाली में एक नामी मिशनरी स्कूल के प्रिंसिपल भी पीसी सिंह के खास हैं। उनसे भी संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने बात नहीं की। व्हाट्सएप तथा एसएमएस पर भी कोई उत्तर नहीं दिया। इन दोनों की तस्वीरें पीसी सिंह के साथ हैं।