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मक्के की फसल में फाल आर्मी वर्म का प्रकोप, कीट नाशक दवाओं के छिड़काव से सुरक्षा सम्भव


कानपुर,04अगस्त(हि.स.)। मक्का उगाई जाने वाली खरीफ की फसलों में जनपद कानपुर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रमुख स्थान रखता है। वर्तमान में मक्के की फसल में कहीं-कहीं फाल आर्मी वर्म का प्रकोप दिखाई दे रहा है। हालांकि बुआई में देर हो जाने की वजह से इसका प्रकोप अधिक पड़ता है। यह रोग कीट का लार्वा गहरे धूसर रंग लिये पीठ पर तीन धारियों पर छोटे-छोटे काले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं तथा सिर उल्टा (˄) का चिन्ह बना होता है।

कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि मक्के की फसल में इस तरह के लगने वाले रोगों से फसल को क्षति होती है। बायो एजेन्ट एग पैरासिट्वाइड ट्राइकोग्रामा स्पे0 का प्रयोग अण्डे देने की अवस्था में करने से इनकी संख्या की बढ़ोत्तरी में रोक लगायी जा सकती है। यही नहीं जैविक कीटनाशी व बवेरिया बैसियाना 2.5 किग्रा0 प्रति0 हे0 की दर से छिडकाव करने से रोकथाम की जा सकती है।

इस सम्बन्ध में जिला कृषि रक्षा अधिकारी सलीमुद्दीन ने बताया कि कानपुर के बकोठी, गांगूपुर, मकनपुर, बिल्हौर क्षेत्र में मक्का की फसल में फाल आर्मी वर्म का प्रकोप देखा गया। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को रसायनिक नियंत्रण के लिए तत्काल क्लोरोपायरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 की 1.25 लीटर या डाइमेथोएट 30 प्रति. 1.5 लीटर व थायोमेथाक्साम 12.6 प्रति. लैम्बडा साइहैलोथ्रिन 9.5 प्रति जेड.सी. 125 मिली. की 500 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें। किसी भी स्थिति में विकासखण्ड में स्थिति कृषि रक्षा इकाई से सम्पर्क करें और नियंत्रण के लिए सहायता प्राप्त कर सकते हैं।