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फिच ने देश के आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर 7 फीसदी किया


-वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी वृद्धि दर 7 फीसदी रहने का जताया अनुमान

नई दिल्ली, 15 सितंबर (हि.स)। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर झटका देने वाली खबर है। फिच की रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए देश की आर्थिक विकास दर के पूर्वानुमान को घटाकर 7 फीसदी कर दिया है। इससे पहले एजेंसी ने जून में 7.8 फीसदी वृद्धि दर का अनुमान जताया था।

रेटिंग्स एजेंसी फिच ने गुरुवार को जारी अनुमान में कहा कि ऊंची महंगाई दर की वजह से चालू वित्त वर्ष में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7 फीसदी रहेगा। फिच ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि जून में लगाए गए 7.8 फीसदी की वृद्धि दर की तुलना में अब वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

इसके साथ ही एजेंसी ने कहा कि अगले वित्त वर्ष 2023-24 में भी भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.4 फीसदी के पूर्व के अनुमान के मुकाबले अब 6.7 फीसदी तक ही रहने की संभावना है। इससे पहले मूडीज इनवेस्टर सर्विस ने भी वित्त वर्ष 2022-23 के लिए विकास दर के अनुमान को घटाकर 7.7 फीसदी कर दिया था। हालांकि, वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की जीडीपी वृद्धि दर 13.5 फीसदी रही है।

उल्लेखनीय है कि वित्त सचिव टी वी सोमनाथन ने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि वित्त वर्ष 2022-23 में देश का जीडीपी 7 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर हासिल करने की ओर बढ़ रही है। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 7.2 फीसदी पर कायम रखा है।