Sat. Sep 19th, 2020

प्रयागराज कुम्भ,धर्म का इन्टरनेशनल ब्रांड


कोई व्यक्ति या घटना जब एक विशाल जनसमूह को एकाएक चमत्कृत कर दे तो वो एक सुखद स्मृति बन जाती है। वही व्यक्ति या घटना बार-बार एक विशाल जन समूह को प्रभावित करती रहे, उन्हें लाभान्वित करती रहे, उनके प्रेम और विश्वास का प्रतीक बनती रहे तो वो एक वैधता पा जाती है। ये वैधता किसी एजेंसी के सर्टिफिकेट की मोहताज नहीं होती, बल्कि एक जन समूह की श्रद्धा और विश्वास की अमिट मुहर उस व्यक्ति या घटना को वैध और प्रभावोत्पादक बना देती है। कालान्तर में यही वैधता जन्म देती है स्वयं में एक सम्पूर्ण प्रतीक को, एक पहचान चिह्न को, जो अपार जन समूह के लिए विश्वास का पर्याय बन जाता है। इसी श्रद्धा, विश्वास, अपनत्व और आध्यात्मिक प्रेम का पर्याय बनकर आया है प्रयागराज कुम्भ 2019। वैसे तो प्रयागराज कुम्भ एक निश्चित समयान्तराल पर अपने तमाम श्रद्धालुओं को हमेशा से आकर्षित करता आया है लेकिन सूचना तकनीक का ये दौर आज कुम्भ को एक अलग तरह से लोगों के बीच लेकर आ रहा है। पूर्ण योजनाबद्ध तरीके से इस आध्यात्मिक पर्व को जिस तरह देश विदेश में लोगों के बीच पहुँचाया और उनके मन मस्तिष्क में इसकी एक सुन्दर तस्वीर को स्थापित किया जा रहा है, उससे तमाम सतानत धर्मावलम्बियों का अपने धर्म के प्रति स्नेह और सम्मान बढ़ा ही है।

मुझे याद है कि कुछ वर्ष पहले मेरे एक सहयोगी दक्षिण भारत से अपने एक टेलीविजन प्रोडक्शन के लिए प्रयागराज आये। वो संगम एवं कुम्भ को एक निश्चित प्रतीक से प्रदर्शित करना चाह रहे थे। उस समय मेरे मस्तिष्क में आया कि आखिर कुम्भ का कोई प्रतीक क्यों नहीं! आज कुम्भ को एक प्रतीक के रूप में प्रदर्शित करने के लिए इसका अपना एक लोगो है। ओंकार, कलश, साधु, मन्दिर और स्थानार्थियों के चित्र से सजा ये लोगो कहता है सर्वसिद्धिप्रदः कुम्भः। इसे केवल देखने मात्र से पौराणिकता झलकती है। जिस प्रकार दो आसमानी रंग की धाराएं अलग-अलग दिशाओं से आकर एक बिन्दु पर मिलती हैं वो निश्चित रूप से संगम का चित्र मन में उकेरती है। उसी बिन्दु पर रखा कलश एवं धारा के साथ लोगों का जनसमूह संगम स्नान के माहात्म्य को दर्शाता है।

कुम्भ को एक स्थापित ब्रांड के रूप में लोगों के बीच पहुँचाने में अपना पूरा कार्य कर रहा है ‘पेन्ट माई सिटी’ अभियान। अब तक जो दीवारें चेतावनी की सूचनाओं के लिए जानी जाती थी, जो चन्द लोगों को आगाह करने के लिए लिखी जाती थी लेकिन पढ़ी हर आने जाने वाले द्वारा जाती थी। एक तरह से ‘स्टिक नो बिल्स’ एक आम राहगीर के लिए अवांक्षनीय संदेश था। वही दीवारें जब अमिताभ बच्चन से लेकर देवासुरसंग्राम तक की तस्वीर बड़े आकर्षक रूप में दिखा रही हैं, तो दीवारों के गैरजरूरी संदेश जिनसे आँखे फेर लेने का कम करता था, अब दो मिनट रूक कर या चाल धीमी कर निहार लेने का दिल करता है। जैसे कोई एक फिल्म चल जाती है ज़ेहन में, जब हम शहर की एक सैर करके आते हैं। कहीं भगत सिंह की तस्वीर में उनकी कुर्बानी भावुक कर देती है तो कहीं फूलों की टोकरी लिए कोई सुवर्णा अपने तीखे नैन नक्श से दिमाग में डोपामाइन का संचार कर देती है। कहीं किसी दानव का खुला मुख जैसे डराता है तो किसी पयस्वला की अपने नवजात को पयपान कराती तस्वीर ममत्व पैदा कर देती है।

सेल्फी के इस जमाने में जहाँ लोग हर चीज जो खूबसूरत है, हर आयोज जो आकर्षक है, हर क्षण जो महत्वपूर्ण है, के साथ खुद को तस्वीर में कैद कर लेते हैं। ये मेला बकायदा ऐसे सेल्फी फ्रीक लोगों के लिए है जहाँ सेल्फी प्वाइंट है, जहाँ प्रयागराज कुम्भ 2019 का बड़ा डिस्प्ले लोगों की आमद के लिए प्रतीक्षारत है। तैयारियों के अंतिम चरण में 70 देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर कुम्भ क्षेत्र का भ्रमण कराना इस मेले की पहुँच और आने वाले यात्रियों के मन को आश्वस्त कर देने का एक उत्तम प्रयास रहा। सूचना तकनीक, जो सम्पूर्ण विश्व को एक ग्लोबल विलेज के रूप में परिवर्तित कर रहा है, उसमें प्रयागराज कुम्भ 2019 की दमदार उपस्थिति से इसकी पहुँच देश देशांतर में दिन प्रतिदिन हो रही है। कोई भी प्रयागराज मेला प्राधिकरण की बेवसाइट से दुनिया के किसी भी कोने में बैठ कर कुम्भ की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकता है। सोशल मीडिया जिसमें हर कोई एक स्वतंत्र प्रसारक होता है, भी कुम्भ के प्रतीक को सात समुन्दर पार बड़ी सहजता से पहुँचा रहा है।
कुल मिलाकर प्रयागराज कुम्भ 2019 विश्व-पटल पर एक ऐसे ब्रान्ड के रूप में उभरा है जिसने दुनिया भर के लोगों का ध्यान सनातन धर्म की एकता और अखण्डता के प्रति खींचा है और अपने तमाम धर्मावलम्बियों को इसकी अक्षुण्णता के प्रति आश्वस्त किया है।