Sun. May 22nd, 2022

प्रणिता जांभोरकर और श्रीरंग देवरस को मिलेगा मार्डीकर स्मृति पुरस्कार


नागपुर, 23 अप्रैल (हि.स.)। युवा झेप प्रतिष्ठान के अध्यक्ष एवं पूर्व मेयर संदीप जोशी ने बताया कि नागपुर की प्रणिता जांभोरकर और मध्यप्रदेश के श्रीरंग देवरस को इस वर्ष का मार्डीकर स्मृति पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। नागपुर के मार्डीकर परिवार और युवा झेप प्रतिष्ठान की ओर से संयुक्त रूप से यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

इस बारे में जानकारी साझा करते हुए अरविंद मार्डीकर और संदीप जोशी ने बताया कि मार्डीकर परिवार और युवा झेप प्रतिष्ठान की ओर से संयुक्त रूप से यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। विगत आठ वर्षों से प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस वर्ष सम्मानपूर्वक दोनों व्यक्तियों तक यह पुरस्कार पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। बतौर जोशी, विभिन्न क्षेत्रों में सेवाभाव से काम करने वाले व्यक्तियों का इस पुरस्कार के लिए चयन किया जाता है। जोशी ने बताया कि संग्रहणीय पुस्तकें, चेक, प्रमाणपत्र के स्वरूप में यह पुरस्कार दिया जाता है। इस वर्ष नागपुर की प्रणिता जांभोरकर और बालाघाट के श्रीरंग देवरस का इस पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। वहीं, गुरुदक्षिणा के तौर पर डॉ. हेडगेवार स्मृति समिति को संस्थागत पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

प्रणिता जांभोरकरः प्रणिता जांभोरकर पिछले एक दशक से समाज सेवा में सक्रिय हैं। वह 2014 से अध्ययन और संस्कृति वर्ग के माध्यम से सेवा बस्ती में बच्चों के जीवन को आकार देने में योगदान दे रही हैं। प्रणिता जांभोरकर विभिन्न गतिविधियों जैसे शिक्षण, खेती, विभिन्न खेलों के माध्यम से बच्चों का अध्ययन, पेंटिंग, संगीत के साथ-साथ व्यायाम, स्वास्थ्य देखभाल, लेखन, पढ़ने के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण में योगदान देती हैं। उन्होंने बच्चों को छोटी-बड़ी चीजों से स्वरोजगार और आय एवं बचत के साधन भी सिखाए हैं। कोरोना लॉकडाउन के दौरान भी उन्होंने बस्तियों में भोजन और अन्य राहत सेवाओं की डिलीवरी में योगदान दिया। जांभोरकर के योगदान ने स्वाभिमानी, संस्कारी और देशभक्त बच्चों की एक पीढ़ी बनाने में मदद की है।

श्रीरंग देवरसः मध्य प्रदेश के वारासिवनी के मूलनिवासी श्रीरंग देवरस बालाघाट जिले के रामपयाली में श्रीराम सेवा समिति के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। वह पिछले 7 वर्षों से इस क्षेत्र में अथक परिश्रम कर रहे हैं। उन्होंने धार्मिक गतिविधि के तहत 125 गांवों से ग्राम मंगल पदयात्रा शुरू की है। सामाजिक समरसता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 25,000 से अधिक लोगों की उपस्थिति में इस आयोजन को सफल बनाया था। तब से हर साल इस मंगल पदयात्रा का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन की खास बात यह है कि यह पर्यावरण के अनुकूल चीजों पर जोर देता है। कार्यक्रम में प्लास्टिक का प्रयोग पूर्णत: प्रतिबंधित है। इसके अलावा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों, प्रवचनों, व्याख्यानों, योग शिविरों, प्रशिक्षण, दिवाली अन्नकूट कार्यक्रमों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, अन्नदान, नशामुक्ति, जैविक खेती स्वास्थ्य शिविर के आयोजन के देवरस की सक्रिय भूमिका रहती है। रामपयाली गांव को भगवान रामचंद्र के वनगमन मार्ग के प्रस्तावित सर्किट में शामिल करने का उनका प्रयास है। इसी तरह रामपयाली गांव में उन्होंने डॉ. हेडगेवार का स्मारक बनाने का फैसला किया है।