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देश में होम्योपैथी के प्रति बढ़ रही है जागरूकता : डॉक्टर बिपिन चन्द्र लखेड़ा


नई दिल्ली, 09 अप्रैल (हि.स.)। होम्योपैथी की खोज भले ही जर्मनी में हुई लेकिन चिकित्सा की यह विधा भारत में आकार ले रही है। यहां होम्योपैथिक उपचार की उपलब्धता, पहुंच और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए होम्योपैथिक शिक्षकों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों व छात्रों की क्षमता संग कौशल विकास को लेकर कार्य किया जा रहा है।

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के होम्योपैथिक चिकित्सालय के आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) के अधिकारी डॉक्टर बिपिन चन्द्र लखेड़ा ने कहा कि भारत में होम्योपैथी के प्रति लोगों में जागरूकता और भरोसा बढ़ा है। ऐसे में होम्योपैथी के डॉक्टरों की जिम्मेदारी मरीजों के प्रति और बढ़ गई है।

लखेड़ा ने शनिवार को हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत करते हुए कहा कि एलोपैथी की तुलना में होम्योपैथी बहुत अधिक प्रभावी है, क्योंकि यह केवल लक्षणों का उपचार करने के बजाय बीमारी को जड़ से खत्म करती है। यह हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली और शरीर के प्राकृतिक रक्षा तंत्र को मजबूत करता है। जिससे शरीर को संक्रमण से स्वयं लड़ने में मदद मिले।

लखेड़ा ने कहा कि कोरोना के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने होम्योपैथिक दवाओं का सेवक कर कोरोना संक्रमण से बचे रहे। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान जब एलोपैथ ने लगभग हाथ खड़े कर लिए थे तो होम्योपैथिक दवाओं ने लोगों को इस महामारी से बचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान बहुत से ऐसे मरीज उनके पास आए जिनकी खांसी ठीक ही नहीं हो रही थी लेकिन होम्योपैथिक दवाओं के सेवन से उन्हें आराम मिला।

लखेड़ा ने कहा कि होम्योपैथिक उपचार और दवाओं के लाभ के बारे में जागरूकता लाने के लिए पूरी दुनिया में 10 अप्रैल को होम्योपैथी के जनक माने जाने वाले जर्मन मूल के ईसाई फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन के जन्मदिन पर मनाया जाता है।

लखेड़ा ने कहा कि देश में लोगों को होम्योपैथिक के प्रति और जागरूक करने की जरूरत है। जिससे अधिक से अधिक लोग पूर्णरूप से रोगमुक्त हो सकें। यह विधा गंभीर से गंभीर बीमारियों को पूर्णरूप से ठीक कर देती है। होम्योपैथी की मीठी गोलियां मधुमेह, ब्लड प्रेशर, यूरिक एसिड,थायराइड जैसी बीमारियों को पूर्णरूप से ठीक कर सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि दुनियाभर में 10 अप्रैल को विश्व होमियोपैथी दिवस मनाया जाता है। इस दिन लोगों को होमियोपैथी के प्रति जागरूक किया जाता है। जर्मन मूल के फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन को होमियोपैथी का जनक माना जाता है। इस दिन उनकी जयंती पूरी दुनिया में मनाई जाती है। इस वर्ष विश्व होमियोपैथी दिवस पर होम्योपैथी-पीपुल्स चॉइस फॉर वेलनेस थीम रखी गई है।