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देश में पिछले आठ साल में 228 पुरावशेष को विदेशों से वापस लाया गया- जी किशन रेड्डी


नई दिल्ली, 14 जून (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि देश में पिछले आठ साल में 228 ऐतिहासिक बेशकीमती धरोहरों को विदेशों से वापस लाया गया है। जबकि इससे पहले इन पुरावशेष की संख्या सिर्फ 13 थीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विदेशों से स्वदेशी ऐतिहासिक धरोहरों को वापस लाने का काम तेजी से हुआ है। इनमें से ज्यादातर ऐतिहासिक पुरावशेष यूके, जर्मनी, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई देशों से लाए गए। इन देशों के साथ भी राजनयिक रिश्ते मजबूत हुए।

नई दिल्ली में आयोजित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ आर्कियोलॉजी (काबा) की मीटिंग में संबोधित करते हुए जी किशन रेड्डी ने कहा कि साल 2021-22 के बजट में घोषित पांच आइकोनिक साइट्स पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। इन साइट्स में शिवसागर, ढोलावीरा, आदिचेल्लनूर, राखीगढी समेत हस्तिनापुर शामिल हैं। ये सभी आइकॉनिक साइट्स हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के साथ पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा देगी।

उन्होंने कहा कि एमसर एक्ट 1958 के तहत एएसआई भारत के ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित एवं उनमें बुनियादी सुविधाएं विकसित करने का महत्वपूर्ण काम कर रहा है। आगामी एक साल में जी 20 देशों के सम्मेलनों की अहम बैठक के लिए भी अब काम तेजी से करना होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि काबा की बैठक में निकले निष्कर्ष में स्मारकों के संरक्षण के काम में तेजी आएगी और नए कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में काम तेजी से होगा। उन्होंने कहा कि एएसआई ने स्मारकों के संरक्षण में कई कीर्तिमान स्थापित किए।

हर घर गंगा कैंपेन में दें अहम य़ोगदान

जी किशन रेड्डी ने आहवान करते हुए कहा कि एएसआई हर घर गंगा कैंपेन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। एएसआई अपने स्मारकों के आसपास के गांव में इस कैंपेन के बारे में जागरुकता फैला सकते हैं और इसमें अहम भागीदारी निभा सकते हैं।

बता दें कि काबा का गठन साल 1945 में भारतीय संविधान के अनुसार किया गया था। काबा का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है। काबा एक ऐसा बोर्ड है जो ऐतिहासिक महत्व की साईटों, इमारतों, संग्रहालयों के रख-रखाव सहित खुदाई व संरक्षण जैसे एएसआई के कार्यों के लिए राज्यों के संस्कृति सचिवों के साथ मिलकर केंद्र सरकार को अनुशंसा करती है। सही मायनों में कहा जाए तो एएसआई के भविष्य को तय करने का काम काबा द्वारा किया जाता है।