Wed. Sep 28th, 2022

दुर्गा पूजा : मानक के अनुसार बनाएं पंडाल, बिजली पर रखें नजर


बेगूसराय, 20 सितम्बर (हि.स.)। दो वर्ष के लॉकडाउन के बाद हो रहे दुर्गा मेला को लेकर जिला प्रशासन हर पहलुओं पर नजर रख रही है। इस संबंध में डीएम एवं एसपी ने सभी पदाधिकारियों को व्यवस्था, सुरक्षा एवं नगर निकाय चुनाव के आचार संहिता पालन सहित हर गतिविधि पर नजर रखने का निर्देश दिया है।

जिला प्रशासन द्वारा शांतिपूर्ण और सुरक्षित दुर्गा पूजा मनाया जाने को लेकर साफ-सफाई, बिजली व्यवस्था, अग्निशामक, अस्पताल की व्यवस्था आदि के निर्देश देने के साथ पंडाल निर्माण सहित अन्य दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। डीएम रोशन कुशवाहा ने पूजा समितियों से अपील किया है कि पंडाल भारतीय मानक ब्यूरो आई.एस. 8758-1993 के अनुरूप ही बनाएं।

डीएम ने कहा है कि फायर रिटारडेंट सोल्यूशन में उपचारित किया हुआ सूती कपड़े का पंडाल बनाया जाए। पंडाल के प्रत्येक एक सौ वर्ग मीटर स्थान पर नौ लीटर क्षमता का अग्निशामक यंत्र लगाएं। पंडाल का निर्माण रेलवे लाईन, विद्युत सबस्टेशन, चिमनी या भट्ठे से कम-से-कम 15 मीटर की दूरी पर करें। पंडाल के चारों तरफ चार-पांच मीटर खुला स्थान रखें।

पंडाल में कम-से-कम तीन द्वार रखें, प्रत्येक पंडाल के लिए अलग से फ्यूज सर्किट ब्रेकर लगाया जाए। बिजली की तार को अच्छे से टेपिंग करें, संभव हो तो बिजली का तार पीवीसी पाईप से गुजारा जाए। बिजली कट जाने पर स्पार्कलेस लाईट का प्रयोग करें। पूजा करते समय अगरबती, आरती, दीप आदि सावधानी से सुरक्षित स्थान पर जलाएं।

अगरबत्ती और आरती होने तक विशेष रूप उस पर ध्यान दें। अस्थाई रसोई घर पंडाल से दो सौ मीटर की दूरी पर बनवाएं। हवन कुंड के पास एक हजार लीटर के चार बड़े ड्रम पानी, बाल्टी एवं मग के साथ रखें। स्थानीय अग्निशमन केन्द्र का टेलीफोन नम्बर जगह-जगह प्रदर्शित करें। रावण दहन वैसे जगह पर करें जहां पर्याप्त जगह हो तथा उसके लिए एक सुरक्षा घेरा बनाएं।

पंडाल तीन मीटर से कम ऊंचाई का नहीं लगाएं, पंडाल बनाने में सिन्थेटिक कपड़ा या रस्सी का प्रयोग नहीं करें। पंडाल बिजली तार के नीचे किसी भी हालत में नहीं लगाएं। किसी भी स्थिति में बिजली तार को खुला नहीं रखें। रोशनी के लिए मोमबती, दीप आदि का प्रयोग नहीं करें, हैलोजन लाईट का प्रयोग पंडाल के अंदर नहीं करें। पंडाल परिसर में धूम्रपान नहीं करें, पंडाल के अंदर हवन कुंड का प्रयोग नहीं करें, हवन कुंड पंडाल से बाहर एवं खुले सुरक्षित स्थान पर बनाएं।