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दिल्ली मेट्रो में केबल चोरी करने वाले गैंग के लिये मेट्रो पुलिस ने बनाई योजना


नई दिल्ली, 10 मई (हि.स.)। दिल्ली की लाइफ लाइन कही जाने वाली मेट्रो के भीतर केबल चोरी के मामले पुलिस और डीएमआरसी के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। आये दिन गैंग लाखों रुपये की केबल चोरी कर फरार हो जाते हैं। इन पर काबू पाने के लिए मेट्रो डीसीपी जितेंद्र मणि और डीएमआरसी की टीम ने मिलकर योजना बनाई है। डीसीपी की मानें तो इस तरह के कई गैंग पकड़े गए हैं और इस तरह की वारदातों में कमी देखने को मिल रही है।

तीन तरीके से चोरी की वारदात को देते है अंजाम

डीसीपी ने बताया कि केबल चोरी करने वाले गैंग मुख्य रूप से तीन तरीकों से वारदात को अंजाम देते हैं। इसमें सबसे पहले वह ऐसी जगह का इस्तेमाल कर मेट्रो परिसर में प्रवेश करते हैं जहां पर मेट्रो अंडर ग्राउंड होती है या अंडर ग्राउंड से बाहर निकलती है। ऐसी जगह पर वह आसानी से मेट्रो ट्रैक पर चले जाते हैं और वहां केबल चोरी कर फरार हो जाते हैं।

दूसरे तरीके में यह गैंग ऐसी जगह चुनते हैं जहां पर मेट्रो ट्रैक के समीप पेड़ मौजूद हो। वह पेड़ के रास्ते मेट्रो ट्रैक पर चले जाते हैं और वहां से कीमती केबल चोरी कर नीचे खड़े अपने साथियों के पास फेंक देते हैं।

तीसरे तरीके में यू-शेप में बने हुए पिलर के बीच मौजूद गैप के सहारे वे ऊपर दाखिल होते हैं। यहां से ट्रैक पर जाकर वह केबल को काटते हैं और उसे नीचे खड़े अपने साथियों के पास फेंक देते हैं। यह भी देखने में आया है कि ऊपर चढ़ने वाला शख्स बेहद हल्का होता है। उसका वजन 40 से 50 किलो होता है ताकि वह आसानी से ऊपर चढ़ सके और वारदात को अंजाम दे सके।

तार को काटने के लिए भी आरोपितों ने बेहद ही खास तरह का कटर बनाया होता है। लकड़ी के सहारे कटर को बांधकर वह केबल को काटते हैं ताकि उन्हें करंट ना लगे।

चोरी होने वाली यह केबल 10 से 15 हजार रुपये प्रति मीटर कीमत की होती है। यह कॉपर की होती है जिसकी वजह से इसकी कीमत ज्यादा होती है। यही वजह है कि इस तरह के गैंग अपनी जान पर खेलकर केबल चोरी करते हैं।

मेट्रो पुलिस ने 78 आरोपितों को किया गिरफ्तार, 23 मामले सुलझाए

डीसीपी ने बताया कि वर्ष 2021 में मेट्रो पुलिस टीम ने 78 आरोपितों को गिरफ्तार कर ऐसे 23 मामले सुलझाए थे। वहीं इस वर्ष 12 वारदातों में 28 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि यह गैंग केबल चुराने के बाद उसे कबाड़ी को बेच देते हैं जो कॉपर को पिघला देते हैं। इसकी वजह से कई बार रिकवरी करना मुश्किल होता है, लेकिन हाल ही में हुई एक वारदात में उन्होंने जामिया के कबाड़ी की पहचान भी की है।

उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। उन्होंने बताया कि आईजीआई के पास हाल ही में एक गैंग को वारदात के समय पकड़ने में उन्हें कामयाबी मिली है। वहां से एक आरोपित को पकड़ा गया था और उसकी निशानदेही पर अन्य आरोपित को पकड़ा गया।

ऐसी वारदातों को रोकने लिये बनाई योजना

आगे डीसीपी ने बताया कि इस तरह की वारदात को रोकने के लिए पुलिस एवं डीएमआरसी मिलकर काम कर रही है। उन्होंने डीएमआरसी को उन जगहों की जानकारी साझा की है जहां इस तरह की वारदातें ज्यादा होती हैं। ऐसी जगह पर उन्होंने गार्ड रखने की सलाह दी है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस की टीम भी उन जगहों पर गश्त करती है। उन्होंने बताया कि जिन जगहों पर पेड़ मेट्रो ट्रैक के पास पहुंचे हुए हैं, वह जगह भी डीएमआरसी को बताई गई है।

उनसे कहा गया है कि वह पेड़ों की कटाई-छंटाई करवाएं ताकि बदमाश इसका फायदा ना उठा सकें। इसके अलावा इस तरह की वारदात करने वाले गैंग पर भी उनकी टीम नजर रख रही है। उन्होंने बताया कि खासतौर से ऐसी जगह पर पुलिस टीम मौजूद रहती है जहां पर मेट्रो अंडरग्राउंड होती है या अंडर ग्राउंड से बाहर निकलती है। इसका फायदा देखने को मिला है और ऐसी वारदातें कम हो रही है।