Mon. Aug 8th, 2022

दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा गलियारों पर कवच प्रणाली का कार्य शुरू : रेल मंत्री


– भविष्य में “कवच” अन्य देशों को निर्यात किए जाएंगे

नई दिल्ली, 03 अगस्त (हि.स.)। भारतीय रेलवे स्वदेश में विकसित ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (टीसीएएस) “कवच” की तैनाती में तेजी ला रहा है। दक्षिण मध्य रेलवे के बीदर-गुंतकल खंड को “कवच” प्रणाली से लैस करने के बाद अब दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा गलियारों पर “कवच” प्रणाली को लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “कवच” प्रणाली को भारतीय रेल के समग्र नेटवर्क पर चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित किया जा रहा है।

वैष्णव ने बताया कि अभी तक, कवच प्रणाली को दक्षिण मध्य रेलवे के बीदर-परली वैजनाथ-परभनी और मनमाड-परभनी-नांदेड़- सिकंदराबाद-गडवाल-धोने-गुंतकल खंड के 1445 मार्ग किलोमीटर पर लगाया गया है। उन्होंने बताया कि भारतीय रेल ने दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा गलियारों (लगभग 3000 मार्ग किलोमीटर के कुल मार्ग) पर “कवच” प्रणाली को लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। इन कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं और उनका मूल्यांकन किया जा रहा है।

इसके अलावा, भारतीय रेल में सर्वेक्षण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और अन्य 6000 मार्ग किलोमीटर पर विस्तृत अनुमान तैयार करने सहित प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिए हैं।

रेल मंत्री ने बताया कि भारत दुनियाभर के उन देशों में से एक है जिन्होंने अपनी गाड़ी सुरक्षा प्रौद्योगिकी विकसित की है। कवच प्रणाली को स्वतंत्र संरक्षा मूल्यांकनकर्ता द्वारा संरक्षा संपूर्णता स्तर-एसआईएल4 के उच्चतम स्तर के लिए प्रमाणित किया गया है। इससे, कवच प्रणाली को अन्य देशों द्वारा अपनाए जाने की क्षमता है। यह परिकल्पना की गई है कि भविष्य में कवच अन्य देशों को निर्यात किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि मानवीय भूल के परिणाम स्वरुप “खतरे का सिग्नल पार करने” और अधिकतम गति के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए, भारतीय रेल ने तीन भारतीय फर्मों के सहयोग से स्वदेशी एटीपी प्रणाली (स्वचालित गाड़ी सुरक्षा प्रणाली) “कवच” तैयार की है। इस प्रणाली में गाड़ी की गति संरक्षा सीमा से अधिक होने पर स्वत: ब्रेक लग जाती है। “कवच” प्रणाली खराब मौसम, जैसे घने कोहरे के दौरान जब संकेतों की दृश्यता कम हो जाती है, मैं भी रेल गाड़ी चलाने में सहायता करती है।

मंत्री ने बताया कि जुलाई 2020 में भारतीय रेल की राष्ट्रीय स्वचालित गाड़ी सुरक्षा प्रणाली के रूप में “कवच” को अपनाने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया था। उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन)/ अत्यधिक उपयोग किए गए नेटवर्क (एचयूएन) मार्गो पर 35000 मार्ग किलोमीटर से अधिक मार्ग पर कवच के कार्यों को 2020-21 और 2021-22 के निर्माण कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

इसके कार्यान्वयन में जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए, जिसके लिए सभी रोलिंग स्टॉक, मार्गवर्ती स्टेशनों और रेल पथ को कवच से सुसज्जित करने की आवश्यकता होती है, कवच प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित करने का निश्चय किया गया है।

कवच प्रणाली के लाभ

कवच लोको पायलट के लिए एक सहायक उपकरण है जो “खतरे का सिग्नल पार करने” पर होने वाले परिणामों को रोकता है और गाड़ी की अधिक गति होने पर स्वत: ब्रेक लगाता है। यदि लोको पायलट टर्नआउट, अस्थाई गति प्रतिबंध और स्थाई गति प्रतिबंध के समय ब्रेक नहीं लगाता है, तो कवच स्वत: ब्रेक लगाकर गाड़ी की गति नियंत्रित करता है। केविन में लाइन साइड के सिग्नल संकेतों को दोहराया जाता है जोकि अधिक गति और कोहरे के मौसम में बहुत उपयोगी है। इसके अलावा रेल फाटक पर स्वत: सीटी बजाना भी इसमें शामिल है।