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तपन दत्त हत्याकांड में सीबीआई जांच को खंडपीठ में चुनौती


कोलकाता, 14 जून (हि.स.)। ग्यारह साल पहले हावड़ा के बाली थाना इलाके में रहने वाले मशहूर पर्यावरणविद तपन दत्त की हत्या की सीबीआई जांच संबंधी हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई है। मामले के एक आरोपित षष्ठी गायन ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ में पुनर्विचार याचिका लगाई है। चार्जशीट में गायन का नाम है। याचिका स्वीकृत हो गई है। इस पर जल्द सुनवाई होगी।

गत 9 जून को न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने हत्या के 11 साल बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलने का जिक्र कर घटना की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि किसी ऐसी एजेंसी को जांच दिए जाने की जरूरत है जिस पर परिवार और समाज को भरोसा हो। इस हत्याकांड में ममता सरकार के मंत्री और वरिष्ठ नेता अरूप रॉय की भी संलिप्तता के आरोप लगे थे।

2011 में गोली मारकर कर दी गई थी हत्या

2011 की 06 मई को गोली मारकर तपन दत्त की हत्या कर दी गई थी। उस समय हावड़ा जिले के धाकड़ तृणमूल नेता अरूप रॉय का नाम हत्याकांड में जुड़ा था। मृतक की पत्नी की तरफ से जो प्राथमिकी दर्ज कराई गई उसमें स्थानीय तृणमूल नेता और कार्यकर्ताओं सहित 13 लोगों के नामजद किया गया था। निचली अदालत से लेकर कोलकाता हाईकोर्ट और यहां तक कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था, जहां से दोबारा हाईकोर्ट में सुनवाई के आदेश हुए। तारीख पर तारीख पड़ते गए और 11 साल बाद भी पीड़ित को इंसाफ नहीं मिला।

इस हत्याकांड के समय नई-नई मुख्यमंत्री बनीं ममता बनर्जी ने जांच की जिम्मेवारी राज्य सीआईडी को सौंपी थी। प्रारंभिक जांच में सीआईडी ने यह बात स्वीकार की थी कि जलीय भूमि को भर कर अवैध निर्माण के खिलाफ पर्यावरणविद तपन दत्त ने आंदोलन किया, जिसकी वजह से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी।

तृणमूल नेता और मंत्री अरूप रॉय पर है हत्या का आरोप

30 अगस्त, 2011 को सीआईडी ने चार्जशीट दाखिल कर दी जिसमें हावड़ा के कई तृणमूल नेताओं के नाम थे। उसके बाद 26 सितंबर 2011 को सीआईडी ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जिसमें बिना कोई कारण बताए उन नेताओं में से नौ लोगों के नाम हटा लिये गये। जिन लोगों के नाम हटाये गये वे सभी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे। बाकी जो पांच लोग थे वे भी दिसंबर 2014 में साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गए।

इसके बाद तपन दत्त की पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई और 2017 में दो जजों की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और जल्द से जल्द मामले की सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया।

तपन दत्त की पत्नी प्रतिमा ने कहा है कि इस हत्या की घटना में हावड़ा के धाकड़ तृणमूल नेता तथा राज्य के मंत्री अरूप रॉय, कल्याण बसु, षष्टि गायन सहित कई नेता शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि पहली चार्जशीट में अरूप का भी नाम था लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव में सीआईडी ने बिना किसी कारण उनका नाम हटा दिया। इसके बाद गुरुवार को कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था और सीआईडी को जांच संबंधित सारे दस्तावेज केंद्रीय एजेंसी को सौंपने को कहा है।