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डूरंड कप का फाइनल आज, मुंबई सिटी एफसी और बेंगुलरु एफसी पर टिकी नजरें


कोलकाता, 18 सितंबर (हि.स.)। एशियाई महाद्वीप की सबसे पुरानी फुटबॉल प्रतियोगिता ‘डूरंड कप’ का फाइनल रविवार को मुंबई सिटी एफसी और बेंगुलरु एफसी टीम के बीच खेला जाएगा। इस साल 16 अगस्त को शुरू हुए इस टूर्नामेंट का यह 131वां संस्करण है। इसका आयोजन तीन शहरों कोलकाता, इंफाल और गुवाहाटी में हुआ। टूर्नामेंट का फाइनल कोलकाता के ऐतिहासिक सॉल्ट लेक स्टेडियम में शाम 6 बजे से शुरू होगा।

मुंबई सिटी एफसी और बेंगलुरु एफसी की टीमें पहली बार टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची हैं। मुंबई ने पिछली बार की उपविजेता मोहम्मदन सिटी को सेमीफाइनल में 1-0 से हराकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। बेंगलुरु एफसी ने हैदराबाद एफसी को 1-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। पिछली बार की विजेता गोवा एफसी इस बार ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गई।

इंडियन सुपर लीग में हिस्सा लेने वाले सभी 11 क्लबों को इस बार डूरंड कप का हिस्सा बनने का मौका मिला है। मुंबई सिटी एफसी, ओडिशा एफसी और नॉर्थ ईस्ट यूनाईटेड ने पहली बार इस प्रतियोगिता में भाग लिया। 20 टीमों को कुल 4 ग्रुपों में बांटा गया था। हर ग्रुप से टॉप 2 टीमों ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। पिछले साल तक यह टूर्नामेंट महज एग्जिबिशन टूर्नामेंट के रूप में खेला जा रहा था। इस साल यह देश में क्लब फुटबॉल के उद्घाटन टूर्नामेंट के रूप में खेला जा रहा है। यह टूर्नामेंट भविष्य में भी इसी रूप में खेला जाएगा।

डूरंड कप का आयोजन पहली बार साल 1888 में हुआ था। शुरुआती दौर में ये प्रतियोगिता शिमला में खेली जाती थी और तब इसमें मुख्य रूप से भारतीय सशस्त्र सेना की अलग-अलग यूनिट भाग लिया करती थीं। 1940 में टूर्नामेंट को दिल्ली में शिफ्ट किया गया। उस समय ब्रिटिशराज के अंदर देश की सेना की अधिकतर टुकड़ियां द्वितीय विश्व युद्ध के लिए भेजी गईं थी। इसलिए सिविल फुटबॉल क्लबों को मौका दिया गया।

1940 के बाद मोहन बगान और ईस्ट बंगाल ने ही सबसे ज्यादा 16-16 बार प्रतियोगिता का खिताब जीता है। प्रतियोगिता में अब भी सशस्त्र सेनाओं की भागीदारी होती है। भारतीय थलसेना का पूर्वी कमान सह आयोजक होता है। इस बार भारतीय सेनाओं की ओर से आर्मी ग्रीन, आर्मी रेड, इंडियन एयरफोर्स और इंडियन नेवी की टीमों ने भी भाग लिया है।