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टेमी दागने की परम्परा के साथ मधुश्रावणी पर्व का समापन


सहरसा,31 जुलाई (हि.स.)। मिथिला में नवविवाहिता द्वारा पारंपरिक पर्व मधुश्रावणी पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मिथिला की प्राकृतिक सौन्दर्य और अलौकिक परंपरा का सम्मिश्रण इस पर्व में दृष्टिगोचर होता है।प्रकृति के साथ एकात्मता-समन्वय और सह-अस्तित्व में ही पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित है। आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की दिव्यता के स्मरण एवं पर्यावरण के संरक्षण हेतु आस्था एवम् सौभाग्य वृद्धि का विशिष्ट पर्व मधुश्रावणी प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी सम्पूर्ण मिथिला में नवविवाहित महिला द्वारा निष्ठापूर्वक मनाया गया।

अपने पति के लम्बी आयु के लिए मैथिलानी नवविवाहिता सावण महीने के कृष्णपक्ष के पंचमी तिथि से तेरह दिन तक नियम-निष्ठापूर्वक माता पार्वती, महादेव एवं विषहरा माता की पूजा एवम् आराधना करती है।मूलतः मैथिल ब्राह्मण, कायस्थ एवं सुनार जाति के नवविवाहिता महिला द्वारा यह पावन पर्व मधुश्रावणी शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रविवार को सम्पन्न हुआ।प्रकृति के साथ एकात्मता-समन्वय और सह-अस्तित्व में ही पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित है। आध्यात्मिक एवम् सांस्कृतिक मूल्यों की दिव्यता के स्मरण एवं पर्यावरण के संरक्षण हेतु आस्था एवम् सौभाग्य वृद्धि का विशिष्ट पर्व मधुश्रावणी प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी सम्पूर्ण मिथिला में नवविवाहित महिला द्वारा निष्ठापूर्वक मनाया गया।

ज्ञात हो किसावण महिने के कृष्णपक्ष के पंचमी तिथि से तेरह दिन तक नियम-निष्ठापूर्वक शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रविवार को मधुश्रावणी पर्व का समारोप किया गया।