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जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर बड़ा विरोध नहीं, राजनीतिक दलों के अपने मत: केंद्र


नई दिल्ली, 27 जुलाई (हि.स.)। केंद्र सरकार ने कहा है कि जम्मू कश्मीर राज्य में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर कोई बड़े स्तर पर विरोध नहीं है। हालांकि विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस रिपोर्ट पर अलग-अलग मत प्रकट किए हैं।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि परिसीमन आयोग ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के आधार पर परिसीमन की सिफारिश की थी। इस दौरान आयोग ने अत्यधिक दूरी पर स्थित होने के कारण अपर्याप्त संचार और जन सुविधाओं की कमी वाले भौगोलिक क्षेत्रों अथवा अंतरराष्ट्रीय सीमा की प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रतिनिधित्व पर भी विचार किया है।

उन्होंने बताया कि जम्मू क्षेत्र और कश्मीर क्षेत्र के लिए क्रमशः 37 और 46 विधानसभा सीटों की पूर्ववर्ती संख्या की तुलना में परिसीमन आयोग ने जम्मू क्षेत्र के लिए 43 सीटें और कश्मीर क्षेत्र के लिए 47 सीटें अधिसूचित की हैं। राज्य से जुड़े एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में वर्तमान में कहीं भी इंटरनेट सेवा बाधित नहीं है। पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाओं को अस्थाई तौर पर निलंबित किया गया था। हालांकि बाद में क्रमबद्ध ढंग से सेवाओं को बहाल कर दिया गया।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री राय ने यह भी बताया कि इस वर्ष के दौरान जम्मू-कश्मीर में मीडिया से जुड़े दो व्यक्तियों को जन सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां किसी व्यक्ति से पेशे या अन्य किसी कारण से भेदभाव नहीं करतीं और कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। यह देश की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रतिकूल गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ की जाती हैं।