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छलका शहीद वीरांगना का दर्द


रमेश सर्राफ

झुंझुनू, 17 फ़रवरी (हि.स.)। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 18 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के जवानों से भरी बस को ब्लास्ट करने वाले आतंकी संगठन के मास्टर माइन्ड गाजी कामरान सहित तीन आतंकियों को मौत के घाट उतारने वाले राजस्थान में झुंझुनू जिले के टीबा बसई गांव के श्योराम गुर्जर के परिवार को राजस्थान की सरकार भूल गई है। सरकार खुद के किए वादे भी पूरे नहीं कर पा रही। इस मुठभेड़ में श्योराम गुर्जर सहित सेना के पांच और जवान शहीद हुए थे। श्योराम गुर्जर की वीरता पर तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे ने उन्हे आर्मी डे 15 जनवरी 2020 को शहीदोपरांत शहीद की वीरांगना सुनीता देवी को सेना पदक प्रदान किया था।

शहीद श्योराम गुर्जर की शहादत के तीन साल बाद भी अभी तक राजस्थान सरकार ने शहीद वीरांगना से किये वादे पूरे नहीं किये हैं। शहीद परिवार के आश्रितों के लिए सरकार जहां नियमों में रियायत और शिथिलन देने का दावा करती है। तो इसके उलट नियमों की पेचिदगियों लगाकर शहीद वीरांगना को चक्कर लगवा रहे हैं। जिसके चलते शहीद की वीरांगना को तीन साल बाद भी सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई। यह तब हो रहा है जब सरकार यह कह रही है कि वे शहीद परिवारों के प्रति संवेदनशील है। जबकि हकीकत इससे दूर है।

सरकार की ओर से शहीदों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान है। पहले सरकार की ओर से योग्यता के अनुसार नौकरी के लिए आवेदन करने पर उसे सरकार की ओर से नौकरी दी जाती थी। 2019 में राज्य सरकार ने इसमें बदलाव कर दिया। जिसके तहत अधिकारी पद के लिए सरकारी नौकरी न देकर कर्मचारी की नौकरी देने का प्रावधान हुआ। इसमे लेवल दस तक ही शहीद परिवार को अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है। अब शहीद परिवार के आश्रितों को अधिकारी ना बनाकर बाबू व चपरासी बनाया जाने लगा है।

शहीद वीरांगना सुनीता देवी ने सैकंड ग्रेड टीचर के लिए 2019 में आवेदन किया। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने उनका आवेदन वापस भिजवा दिया। विभाग का तर्क था कि शहीद कोटे के लिए ग्रेड पे 3600 आरक्षित है। जबकि सैकंड ग्रेड टीचर के लिए ग्रेड पे 4200 है। इसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की राय पर वीरांगना सुनीता देवी ने थर्ड ग्रेड शिक्षक के लिए आवेदन किया। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उनसे रीट पास का प्रमाण पत्र मांग लिया। जबकि तीन साल रीट की परीक्षा ही नहीं हुई थी। इसके बाद रीट का प्रमाण पत्र नहीं होने पर नौकरी नहीं दी गई। इसके बाद शहीद वीरांगना ने सितंबर 2021 में रीट एग्जाम पास कर लिया। उनके पास रीट प्रमाण पत्र भी आ गया। लेकिन पिछले दिनों रीट में पेपर आउट होने की जिम्मेदारी लेते हुए सरकार ने भर्ती को निरस्त कर दिया। रीट उत्तीर्ण का प्रमाण पत्र होने के बावजूद वीरांगना को अभी भी नौकरी नहीं मिलेगी।

यानी शहीद वीरांगना को दोबारा होने वाली रीट परीक्षा का इंतजार करना होगा। फिलहाल इसकी मामले की जांच एसओजी कर रही है। इसको देखते हुए रीट की परीक्षा और आगे खिसकने की संभावना है। इससे देखते हुए शहीद वीरांगना को सरकारी नौकरी के लिए इंतजार करना होगा।

शिक्षक भर्ती को लेकर रीट पास करने वाले पात्र होते हैं। ऐसे में शहीद आश्रित को भी इन्ही नियमों के अनुसार नौकरी दी जा रही है। तो इसमें रियायत कहां मिल रही है? ऐसे में शिक्षा विभाग की मंशा पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी राष्ट्रीय शिक्षा परिषद का हवाला दे रहे हैं। तो दूसरी ओर नियमों में छूट के लिए मुख्यमंत्री स्तर पर ही निर्णय होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

शहीद हवलदार श्योराम गुर्जर की वीरांगना सुनीता का कहना है कि मेरे पति ने देश के लिए अपना फर्ज निभाते हुए शहादत दी उस पर मुझे गर्व है। परन्तु मुझे इस बात का मलाल है कि शहीद की अंतिम यात्रा के समय जो-जो घोषणाएं हुई थी। उसमे एक भी पूर्ण नहीं हुई है। राज्य सरकार के दो केबिनेट मंत्री यहां आए थे। घोषणा की थी कि राज्य सरकार तीन माह में शहीद वीरांगना को नौकरी देगी। स्कूल का नामकरण शहीद के नाम पर होगा। मुख्य सड़क से शहीद स्मारक तक सड़क का निर्माण किया जाएगा। शहादत को तीन वर्ष हो चुके है। परन्तु उनकी एक घोषणा पूर्ण नहीं हुई है। उसे अधिकारी जयपुर व झुंझुनू के चक्कर लगवा रहे हैं। इसके अतिरिक्त शहीद स्मारक के लिए 10 लाख रुपए देने की घोषणा की गई थी। स्मारक पर उनके 14 लाख रुपयों का खर्च आया है। परन्तु उन्हें दिए गए हैं मात्र चार लाख शेष 10 लाख उनके स्वयं के पास से लगे हैं।