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किशन बाग परियोजना बनी आर्कषण का केंद्र, विजिटर्स बुक करा सकेंगे प्रीमियम स्लॉट


जयपुर, 26 फ़रवरी (हि.स.)। जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जयपुर शहर में सौन्दर्यकरण एवं हरियाली विकसित करने स्वरूप विद्याधर नगर में किशनबाग गांव में नाहरगढ की तलहटी में विकसित किशन बाग परियोजना आकर्षण का केंद्र बनने के साथ-साथ पर्यटनीय स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। जिसका आनंद हजारों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक एवं स्थानीय लोग ले रहे है।

जयपुर विकास आयुक्त गौरव गोयल की अध्यक्षता में शनिवार को किशन बाग परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिसमें किशनबाग परियोजना के सफल संचालन के लिए विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। जेडीसी ने बताया कि किशनबाग परियोजना की प्रबंधन एजेंसी द्वारा किशनबाग परियोजना में प्रीमियम स्लॉट का प्रस्ताव रखा गया, जिसका अनुमोदन करते हुए सुबह का प्रथम स्लॉट (3 घण्टे) प्रीमियम स्लॉट के रूप में निर्धारित किया गया है, जिसे ऑनलाईन (बुक माई शो आदि) के माध्यम से बुक किया जा सकेगा। प्रीमियम स्लॉट में प्रथम 100 विजिटर्स किशनबाग परियोजना में भ्रमण का आनंद ले सकेंगे।

प्रबंधन एजेंसी के प्रत्येक मंगलवार को किशनबाग पार्क को बंद रखने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। किशनबाग परियोजना के संचालन के लिए बनाई गई नियमावली के उल्लंघन करने पर 500 रुपये का जुर्माना रखे जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। किशनबाग पार्क होली (धुलण्डी) के दिन अवकाश रखा जायेगा।

इस परियोजना से जयपुर आने वाले वैज्ञानिक एवं शिक्षकीय अभिरूचि के दर्शकों और पर्यटकों को रेत से बनी राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में पाये जाने वाली चट्टानों के बारे में जानकारी एवं इन चट्टानों, रेत के टीबों तथा आद्र भूमि की विषम परिस्थिति में उगने वाले पौधों के बारे में जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त हो रही है एवं जयपुर आने वाले वैज्ञानिक एवं शिक्षकीय अभिरूचि के पर्यटकों में वृद्धि हुई है।

किशनबाग को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य नाहरगढ़ के मौजूद रेतीले टीलों को स्थाई कर वहां पर पाये जाने वाले जीव जन्तुओं के प्राकृतिक वास को सुरक्षित कर संधारित करना एवं रेगिस्थान में प्राकृृतिक रूप से पनपने वाली वनस्पती की प्रजातियों को विकसित कर जयपुर में एक सम्पूर्ण रेगिस्थान क्षेत्र का स्वरूप विकसित कर संधारित करना एवं राजस्थान में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के बलुआ चट्टानों के बनने के बारे में जानकारी तथा राजस्थान की विषम परिस्थितियों (जैसे बलुआ एवं ग्रेनाईट की चट्टानों व आद्र भूमि) में उगने वाले पौधो को मौके पर माईक्रो क्लस्टर के रूप में विकसित कर दर्शकों में वैज्ञानिक एवं शिक्षकीय अभिरूचि पैदा करना है।

आयुक्त गोयल ने बताया कि जयपुर शहर में जेडीए की किशनबाग एक पर्यटनीय स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में सैलानी, देशी-विदेशी पर्यटक एवं भ्रमणकारी आकर प्राकृतिक रेगिस्तानी थीम पर विकसित परियोजना के 18 दिसम्बर, 2021 शुभारम्भ तिथि से ही रोजाना लगभग एक हजार लोग औसतन विजिट कर रहे है।

परियोजना में वीआईपीज के साथ वाईल्ड लाईफ से जुडे लोगों द्वारा भी किशनबाग को पसंद किया जा रहा है। एनवायरमेंट डिर्पार्टमेंट द्वारा किशनबाग के प्रयोग पर एक फिल्म भी बनवाई गई है। जिसे काफी पंसद किया जा रहा है। साथ ही गर्मी के मौसम आने पर भी रेगुलर विजटर्स एवं भ्रमणकारियों की संख्या में बढोतरी हो रही है। परियोजना में ही नर्सरी भी विकसित की जा रही है, जहां विभिन्न रेगिस्थानी प्रजातियों खैर, रोंज, कुमठा, अकोल, धोंक, खेजडी, इंद्रोक, हिंगोट, ढाक, कैर, गूंदा, लसोडा, बर्ना, गूलर, फालसा, रोहिडा, दूधी, खेजडी, चूरैल, पीपल, जाल, अडूसा, बुई, वज्रदंती, आंवल, थोर, फोग, सिनाय, खींप, फ्रास आदि प्रजाति के पेड-पौधें एवं लापडा, लाम्प, धामण, चिंकी, मकडो, डाब, करड, सेवण आदि प्रजाति की घास विकसित की जा रही है। जिससे इन तैयार पौधों का वितरण किया जायेगा एवं प्रजातियों को लुप्त होने से बचाया जा सकेगा।